प्रदेश के ऊपरी क्षेत्रों में बीते दिनों हुई बारिश और ओलावृष्टि से सेब की गुणवत्ता गिरना शुरू हो गई है। बागवानों को उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं। मंडियों में दागी सेब पहुंच रहा है। बुधवार को भी सोलन सेब मंडी में ग्रेड को देखते हुए रेट मिले हैं। सेब के उचित दाम न मिलने से बागवान परेशान हो गए हैं। रोजाना परवाणू और सोलन सेब मंडी में 15 से 20 हजार सेब की पेटियां पहुंच रही हैं, लेकिन सेब की क्वालिटी डाउन होने से सेब आगे सप्लाई नहीं हो रहा है।
सेब मंडी सोलन व परवाणू में इन दिनों सेब का सीजन जोरो पर हैं। अभी तक दोनों मंडियों में 12 लाख सेब की पेटियां पहुंच चुकी हैं।
बुधवार को सोलन सेब मंडी में 15 हजार और परवाणू सेब मंडी में 20 हजार सेब की पेटियां पहुंची हैं। वहीं बीते दिनों बाहरी राज्यों में भारी बारिश के कारण सेब सप्लाई भी बाधित हुई थी। महाराष्ट्र और यूपी की सड़कों में पानी भरने के कारण यहां से आए कारोबारी सेब की खरीद नहीं कर रहे थे। जबकि अन्य मंडियों से भी बहुत कम कारोबारी प्रदेश में सेब खरीद के लिए पहुंच रहे हैं। परवाणू और सोलन सेब मंडी में रोजाना करीब 31 करोड़ का कारोबार किया जा रहा है। जुलाई से अगस्त माह एक पहले सप्ताह तक बागवानों को सेब के अच्छे दाम मिल रहे थे। इस बीच सेब की एक पेटी तीन हजार रुपये तक भी बिकी, लेकिन अब बाहरी राज्यों में बारिश से कम कारोबारियों का प्रदेश में पहुंचना और ओलावृष्टि से हुए दागी सेब के बागवानों को बहुत कम दाम मिल रहे हैं।
ओलावृष्टि से गिरी सेब की गुणवत्ता
मंडी समिति सोलन के सचिव डॉ. रविंद्र शर्मा ने कहा कि मंडी में ओलावृष्टि से दागी हुआ सेब भी पहुंच रहा है। जिसके ग्रेड के हिसाब से दाम मिल रहे हैं। उन्होंने बागवानों से अपने उत्पाद को ग्रेड कर मंडी में लाने की अपील की है। ताकि उन्हें उनके उत्पाद के अच्छे दाम मिल सकें।