हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस परमार और राज्यपाल अश्वनी कुमार (पूर्व राज्यपाल) सहित कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों को देने वाला राजकीय शमशेर सीनियर सेकेंडरी स्कूल नाहन को 232 वर्ष बाद भी राज्य धरोहर का दर्जा नहीं मिल पाया है।
वहीं, 1903 में बना कालका-शिमला रेल ट्रैक को धरोहर का दर्जा मिल चुका है। प्रदेश के इतिहास में इस स्कूल का कहीं भी जिक्र नहीं है जबकि अभी भी स्कूल के मुख्य गेट पर लगे दुर्लभ बड़े घंटा से ही यहां टाइम पीरियड निर्धारित होता है।
30 अप्रैल 1783 को शुरू हुए इस स्कूल को राज्य धरोहर के रूप में संरक्षित करने का मुद्दा सरकारों से कई बार उठाया जा चुका है लेकिन किसी ने भी गौर नहीं किया। इस स्कूल ने देश को 7 स्वतंत्रता सैनानी, 13 आईएएस, 5 आईपीएस, 3 सांसद और 3 लेफ्टिनेंट जनरल दिए। इसके अलावा एक पूर्व सीबीआई निदेशक अश्वनी कुमार, दो राज्य मंत्री, एक विधायक भी शमशेर स्कूल से शिक्षा ग्रहण कर चुके हैं।
नाहन के महाराजा के नाम पर स्कूल
नाहन के महाराजा शमशेर प्रकाश के नाम पर स्थापित इस स्कूल में आज भी दुर्लभ वस्तुओं का संग्रहालय है जो पुरातत्व एवं शोधकर्ताओं को अपनी और खींचता है। इस विद्यालय में कुंवर राव राजा राम हरवंश, कुंवर वीरेंद्र सिंह सिरमौर रियासत के राजा, चरित्र अभिनेता मोहन सूरी ने भी यहां पर पढ़ाई की थी। सैकड़ों की संख्या में वन प्रशासनिक अधिकारी, खिलाड़ी, अभिनेता, साहित्यकार, न्याय एवं विधि विभाग की हस्तियों ने अपनी शिक्षा की बुनियाद यहीं से तैयार की।
इन आईएएस अफसरों ने की है यहां पढ़ाई
एसएस परमार (पूर्व मुख्य सचिव हिप्र), पंडित रामस्वरूप, पंडित मूलराज, ठाकुर गजेंद्र सिंह, रघुवीर सिंह, कंवर नरवीर सिंह, बलवंत राय सेन, विनोद प्रकाश गुप्ता, अशोक कुमार, कश्मीर सिंह, दुर्गेश जोशी, राजेंद्र सिंह नेगी और मनोज अग्रवाल।
इन आईपीएस अधिकारियों ने बढ़ाया मान
कुंवर अजीत सिंह, जगत सिंह, गंगवीर सिंह, एडी बाली और विजय सिंह।
ये स्वतंत्रता सेनानी भी पढ़े हैं यहां
डा. देवेंद्र सिंह चौहान, धर्म नारायण वकील, बीडी कौशिक, जगमोहन रमौल, भाई राजेंद्र सिंह, सुमेर चंद अग्रवाल, शिवानंद रमौल। तीन लेफ्टिनेंट- कर्नल, पीआर अग्रवाल, वीके सेवल और डीपी सिंह।
सांसद- प्रताप सिंह, शिवानंद रमौल और मदन लाल।
पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक
तपेंद्र सिंह पूर्व विस अध्यक्ष, ठाकुर गुमान सिंह, भाई सुंदर सिंह, ठाकुर हितेंद्र सिंह और सदानंद चौहान।
'शमशेर सीनियर सेकेंडरी स्कूल नाहन का इतिहास गौरवमयी एवं दुर्लभ है। 232 साल पहले यह एक पाठशाला के रूप में शुरू हुई थी। बाद में इसे हाईस्कूल एवं जमा दो का दर्जा मिला। इस स्कूल को अपग्रेड करने में महाराजा शमशेर प्रकाश का विशेष योगदान रहा। प्रदेश की सबसे पुराने इस स्कूल को राज्य धरोहर का दर्जा मिले यह पूरे सिरमौर के लोगों की तमन्ना है। इसको लेकर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से भी आग्रह किया जाएगा।'- कंवर अजय बहादुर, चेयरमैन हिमफेड हिप्र
'शमशेर स्कूल को धरोहर घोषित करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा। भाषा एवं संस्कृति विभाग के स्थानीय अधिकारियों से इसकी रिपोर्ट मांगी जाएगी। इस मामले को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को भी भेजा जाएगा।'- अरुण कुमार शर्मा, निदेशक, भाषा एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश