नगर निगम ने यूनिट एरिया मेथड से प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने के नियम तैयार कर लिए हैं। नगर निगम की विशेष बैठक में ये नियम तैयार किए गए हैं। नए नियम में जोन और फैक्टर की वैल्यू घटाई और बढ़ाई है।
टैक्स एक्ट में संशोधन करने की मांग का प्रस्ताव पारित करते हुए नगर निगम सदन ने सरकार को यूनिट एरिया मेथड से टैक्स वसूली के नियम भेज दिए हैं। अब दो सप्ताह के भीतर राज्य सरकार इस पर फैसला लेगी।
हाईकोर्ट ने नगर निगम और सरकार को तीन सप्ताह के भीतर नियम बनाने के आदेश दिए हैं। महापौर संजय चौहान ने कहा कि शहरी विकास मंत्री ने एक्ट में संशोधन कर नई टैक्स प्रणाली बनाने के निर्देश दिए हैं। निगम की ओर से सरकार से दोबारा इस मामले को गंभीरता से लेते हुए असमानता से भरे यूनिट एरिया मेथड को रद्द करने की मांग की गई है।
किसी का टैक्स कम हुआ, किसी का बढ़ गया
यूनिट एरिया मेथड के तहत शहर को ए और बी जोन में बांटा गया है। नगर निगम के पुराने क्षेत्र को जोन ए और मर्ज एरिया वार्डों को जोन बी में शामिल किया गया है। दोनों जोन की वैल्यू पांच रखी गई है।
अब खाली भूमि पर भी टैक्स लगाने की तैयारी है। जोन ए के तहत 15 फीसदी और जोन बी में 10 फीसदी टैक्स लगेगा। इसमें फैक्टर लागू नहीं होंगे। जोन की वैल्यू के हिसाब से टैक्स लगेगा।
वहीं, जोन ए में सेल्फ यूज वालों को एक से 100 वर्ग मीटर तक 3 फीसदी, जोन बी में 2 फीसदी, 101 वर्ग मीटर से अधिक पर जोन ए में 6 फीसदी और जोन बी में 4 फीसदी टैक्स लगेगा। उधर, नॉन रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर जोन ए में 10 फीसदी और जोन बी में 5 फीसदी टैक्स लगेगा।
टैक्स के विरोध में धरना प्रदर्शन
वहीं, कसुम्पटी भाजपा मंडल और शिमला ग्रामीण मंडल के कार्यकर्ताओं ने वीरवार को नगर निगम दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। मंडल अध्यक्ष राजेंद्र चौहान की अध्यक्षता में मर्ज एरिया से 6 साल का बकाया टैक्स वसूलने की तैयारी का विरोध किया गया।
प्रदर्शन के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर बकाया टैक्स वसूली न करने की मांग की। राजेंद्र चौहान ने कहा कि जब से कसुम्पटी और शिमला ग्रामीण के क्षेत्र नगर निगम में जोड़े गए हैं, तब से इन क्षेत्रों में फूटी कौड़ी भी खर्च नहीं की गई है।
कसुम्पटी और शिमला ग्रामीण क्षेत्र के लोग अपने-अपने भवनों को नियमित कराने व बिजली-पानी मुहैया करवाने की मांग नगर निगम से 8 साल से कर रहे हैं। जब नगर निगम मर्ज एरिया के लोगों को मूलभूत सुविधाएं और उनके भवनों को नियमित नहीं करता, तब तक नगर निगम को इन क्षेत्रों से टैक्स लेने का कोई अधिकार नहीं है।