लालपानी में गरीबों के आवास कर्मियों को देने का मामला, पार्षदों ने एमसी पर उठाए सवाल
मेयर पर भी गरीबों की अनदेखी के आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के लालपानी में गरीबों के लिए बनाए आवास कर्मचारियों को देने के मामले पर नगर निगम प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है। निगम के अपने ही पार्षदों ने एमसी के इस फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही पार्षदों ने मेयर पर भी अनदेखी के आरोप लगाए हैं।
भाजपा पार्षद बिट्टू कुमार ने कहा कि उन्होंने यह आवास गरीबों को देने के लिए कहा था लेकिन प्रशासन ने उनकी बात नहीं मानी। बाद में शहरी विकास मंत्री के समक्ष यह मामला उठाना पड़ा। मंत्री ने निगम को निर्देश दिए थे कि गरीबों को ही यह आवास दिए जाएं। इसके बावजूद नगर निगम ने यहां कर्मचारी ठहरा दिए। पार्षद ने कहा कि इस मामले की मेयर को जानकारी होनी चाहिए लेकिन अनदेखी हो रही है।
कांग्रेस पार्षद सिमी नंदा ने कहा कि गरीबों के लिए बनाए आवासों पर इनका ही पहला हक है। कर्मचारियों को नगर निगम प्रशासन दूसरी जगह शिफ्ट कर सकता था। इनके पास घर और जमीन नहीं हैं, उन्हें यह आवास मिलने चाहिए। पार्षद दिवाकर देव शर्मा ने कहा कि जो आवास जिनके लिए बनाए हैं उन्हीं को इनका आवंटन होना चाहिए। कर्मचारी भी नगर निगम के हैं, इनके लिए शिफ्टिंग से पहले व्यवस्था होनी चाहिए।
कर्मचारी बोले, खुद नहीं गए प्रशासन ने भेजा
गरीबों के आशियानों में ठहरे कर्मचारियों का कहना है कि वह खुद इन आवासों में नहीं गए। प्रशासन ने भेजा, तभी गए। सफाई कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष नागेश वाल्मीकि और महासचिव बलवीर सिंह ने कहा कि कर्मचारी भी चाहते हैं कि गरीबों को घर मिले। स्थानीय पार्षद अब इस मामले को उठा रहे हैं जब कर्मचारी इसमें शिफ्ट हुए। पांच साल तक कहां थे जब इसका काम लटका पड़ा था।
मेयर बोलीं, मुझे जानकारी नहीं
मेयर सत्या कौंडल ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। प्रशासन से इस बारे में बात की जाएगी। गरीबों को आशियाने क्यों नहीं मिल रहे हैं, इस पर रिपोर्ट ली जाएगी।