प्रदेश तेजी से प्राकृतिक कृषि राज्य बनने की ओर अग्रसर है। इसलिए देवभूमि को देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा भूमि होना चाहिए, और इसे देश भर के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए प्राकृतिक कृषि के मामले में प्रमुख केंद्र की भूमिका निभानी चाहिए। यह बात राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने नौणी विवि में दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र सम्मेलन के समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था हमेशा से कृषि पर आधारित रही है। दुर्भाग्यवश इस अर्थव्यवस्था की दिशा विदेशी मॉडलों पर बनने लगी है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से इस सोच मेें परिवर्तन हो रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों ने उन्हें अपने अनुभव बताए हैं। इस पद्धति को अपनाने से 27 प्रतिशत लागत कम आती है और लगभग 56 प्रतिशत उत्पादन ज्यादा होता है।
कार्यक्रम को वर्चुअल संबोधित करते हुए केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा कि कृषि क्षेत्र में तकनीकी विस्तार में कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि नैनो टेक्नोलॉजी को किसानों तक पहुंचाने में ये केंद्र सहायक सिद्ध हो सकते हैं। ड्रोन तकनीक को भी कृषि विस्तार केंद्र के माध्यम से प्रदर्शित कर सकते हैं। जिसमें कम पानी, खाद के बारे में खेती सिखाई जाएगी।
युवाओं को कृषि से जोड़ने का लक्ष्य
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि कृषि को बढ़ावा देने और किसानों की आय दोगुना करने के लिए सरकार प्रभावी पग उठा रही है। उन्होंने कहा कि किसान प्राकृतिक कृषि को अपनाने के लिए उत्साहित हैं। आईसीआर के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने कहा कि आईसीआर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा मेें तेजी से अग्रसर है।