निशांत ने कोर्डिसेप का अपने घर में व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। सोलन स्थित निशांत की लैब में करीब 12 किलो कोर्डिसेप की पहली खेप तैयार है, जिसकी कीमत लाखों में है। अभी तक प्रदेश में डीएमआर के अलावा व्यावसायिक तौर पर किसी ने भी कीड़ा जड़ी की खेती नहीं की है।
आईटी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद नौकरी छोड़ हिमाचल प्रदेश के सोलन के युवा निशांत गाजटा ने करीब एक लाख रुपये प्रति किलो बिकने वाली कीड़ा जड़ी यानी कोर्डिसेप नामक मशरूम लगाने में कामयाबी हासिल की है। अभी इस तरह की मशरूम सोलन में मशरूम अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) ही तैयार कर रहा है। केंद्र की ओर से उत्पादकों को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। निशांत ने कोर्डिसेप का अपने घर में व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है।
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सोलन स्थित निशांत की लैब में करीब 12 किलो कोर्डिसेप की पहली खेप तैयार है, जिसकी कीमत लाखों में है। अभी तक प्रदेश में डीएमआर के अलावा व्यावसायिक तौर पर किसी ने भी कीड़ा जड़ी की खेती नहीं की है। कई कृषकों ने इसे लगाने का प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। निशांत ने बताया कि कोरोना काल में जब सबके रोजगार पर तलवार लटक चुकी थी, तब उनके मन में इसकी खेती करने का विचार आया। इसके लिए आवश्यक रॉ मैटीरियल तथा केमिकल आदि की खरीद कर ली।
मशरूम ब्वॉय के नाम से मशहूर हैं निशांत
यूं तो मशरूम सिटी ऑफ इंडिया सोलन में कई तरह की मशरूम उगाई जाती है, लेकिन कोर्डिसेप का उत्पादन कर निशांत मशरूम ब्वॉय के नाम से मशहूर हो चुके हैं। निशांत ने बताया कि उनके माता-पिता ने बहुत साथ दिया। घर पर ही लैब तैयार की, जिसमें कोर्डिसेप की सफलतापूर्वक खेती की है। उन्हें डीएमआर से इसमें कोई विशेष सहयोग नहीं मिला।
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डीएमआर में दिया जा रहा कोर्डिसेप पर प्रशिक्षण : डॉ वीपी शर्मा
मशरूम अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि डीएमआर में समय-समय पर कोर्डिसेप सहित अन्य मशरूम के उत्पादन पर प्रशिक्षण दिया जाता है। केंद्र ने करीब तीन वर्ष पहले इसका उत्पादन शुरू किया है। 20 से 22 सितंबर तक विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाया जा रहा है।
स्टेमिना बढ़ाती है कोर्डिसेप मशरूम
कोर्डिसेप्स मिलिटेरिस एक प्राकृतिक तौर पर उगने वाली जंगली मशरूम है। इसे अब लैब में तैयार करने में सफलता मिल चुकी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह मशरूम मनुष्य के शरीर में रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ाती है। थकान मिटाने और स्टेमिना बढ़ाने में भी कारगर है। चीन के खिलाड़ी इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। चीन और तिब्बत में इसे यारशागुंबा कहा जाता है। फेफड़ों और किडनी के इलाज में भी इसे जीवन रक्षक दवा माना जाता है। कैंसर की रोकथाम और यौन क्षमता बढ़ाने में भी यह लाभकारी है।