देवताओं की घर वापसी के साथ बीते एक सप्ताह से चल रहे अंतरराष्ट्रीय रेणुकाजी मेले का शुक्रवार को समापन हो गया। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने परंपरा के अनुसार विधिवत रूप से देव पालकियों को कंधा देकर विदा किया। देवता अपने देवस्थलों के लिए प्रस्थान कर गए। इससे पूर्व उन्होंने भगवान परशुराम मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। उन्होंने मां रेणुका और भगवान परशुराम से प्रदेश के लोगों के लिए साधन, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की।
ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और शंख घंडियाल की मधुर धुनों के बीच देवताओं की विदाई से रेणुका घाटी कुछ पल के लिए भक्ति रस में डूब गई। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ देवताओं को विदाई दी। साथ ही उन्हें पुन: आगमन का निमंत्रण भी दिया। देव विदायगी के दौरान मां रेणुका और पुत्र परशुराम के मधुर संबंधों, भावनात्मक रिश्तों व वात्सल्य की झलक भी दिखाई दी। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने मेले के सफल आयोजन को लेकर जिला प्रशासन की पीठ थपथपाई।
क्षेत्रवासियों को मेले की शुभकामनाएं भी दीं। देव विदाई के साथ ही मेले में पधारे चारों देवता अपने देवस्थलों की ओर रवाना हो गए। इन्हें सात दिन से श्रद्धालुओं के दर्शनों के लिए मंदिरों में रखा गया था। इस दौरान उपायुक्त राम कुमार गौतम, एसपी ओमापति जम्वाल, रेणुका के विधायक विनय कुमार, जिला परिषद अध्यक्ष सीमा कन्याल, पूर्व विधायक रुप सिंह, भाजपा नेता बलबीर सिंह सहित रेणुका विकास बोर्ड के सदस्य और पदाधिकारी मौजूद रहे।
अपनी संस्कृति को नहीं भूलें लोग: राज्यपाल
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि गोवा और देवभूमि हिमाचल की संस्कृति में काफी समानता है। अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेले के समापन पर पहुंचे राज्यपाल ने रेणु मंच से लोगों को अपनी संस्कृति कभी नहीं भुलाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मैं भगवान परशुराम की पावन धरा पर पहुंच कर एक साथ दो देवी-देवताओं के दर्शन कर पाया हूं। इस पवित्र स्थान पर पहुंचकर परंपरा और संस्कृति का आभास हो रहा है।
उन्होंने गोवा की परिकल्पना देवभूमि हिमाचल से करते हुए कहा कि हिमाचल व गोवा की संस्कृति में समानता दिखाई देती है। वह सुदूर गोवा के निवासी हैं, लेकिन गोवा का प्राचीन नाम गौवंत्क था, जो भगवान परशुराम की ही धरती है। उन्होंने कहा मेले और त्योहार जहां हमें संस्कृति का बोध कराते हैं। वहीं हमें इन मेलों से प्रेरणा भी मिलती है। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश की वेशभूषा, रहन-सहन और भाषाएं भले ही अलग हैं, लेकिन हम सब एक हैं।