विश्व के सबसे बड़े देव समागम अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में अलौकिक एवं भव्य नरसिंह की जलेब यात्रा शुरू हो गई है। आकर्षण का केंद्र नरसिंह की पहली जलेब शनिवार से शुरू हुई। शाही अंदाज में निकली भव्य जलेब को राजा की जलेब भी कहा जाता है। इस जलेब में कुल्लू के राजा परंपरा के अनुसार पालकी में सवार होकर यात्रा करते हैं। पांच दिन चलने वाली इस जलेब में दशहरा में आए सैकड़ों देवी-देवता बारी-बारी हिस्सा लेते हैं।
शनिवार को जलेब में आगे-आगे नरसिंह भगवान की घोड़ी सज धजकर चली, तो राजा की पालकी के साथ दर्जन भर देवी-देवता के रथों ने चार चांद लगा दिए। राजा की चानणी से शुरू हुई जलेब ने पूरे ढालपुर की परिक्रमा की। जिला अस्पताल, कॉलेज गेट, एसबीआई के पुराने दफ्तर व कलाकेंद्र होकर जलेब राजा की चानणी लौट आई। इस अवसर पर भगवान नरसिंह की इस भव्य व शानदार जलेब को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
उल्लेखनीय है कि कुल्लू की देव संस्कृति विश्व भर में प्रसिद्ध है। यही कारण है कि आधुनिकता के इस दौर में भी सदियों पुरानी परंपरा जिंदा है। दशहरा के दूसरे दिन शुरू हुई जलेब पांच दिन तक जारी रहेगी। इस दौरान जलेब में विभिन्न घाटियों के देवी-देवता हिस्सा लेंगे। भगवान रघुनाथ के कारदार दानविंद्र सिंह ने कहा कि जलेब की परंपरा पुरातन है और आज भी इसका निर्वहन बखूबी किया जा रहा है।