एचपी यूनिवर्सिटी में लाठीचार्ज का शिकार हुई छात्रा ने राज्यपाल उर्मिला सिंह से न्याय की गुहार लगाई है। छात्रा खुशबू का कहना है कि जिस समय लाठीचार्ज हुआ, उस समय वह लाइब्रेरी में पढ़ रही थी।
अचानक पुलिसवाले आए और उसे बालों से खींचकर बाहर निकाल लिया। मैंने कहा कि मैं किसी छात्र संगठन से नहीं हूं। तो पुलिसवालों ने मुझे डेढ़ फुटिया कहा और ये भी कहा कि तू पढ़ाई कर क्या करेगी।
खूशबू ने कहा कि इस पर मैंने कहा कि हम लोग पढ़ाई करने आए हैं। यहां से नहीं जाएंगे। तो पुलिसवालों ने मुझे घेर लिया और लात घूसों से पीट डाला। मीडियावालों ने इसकी फोटो भी ली जो मेरे पास है। छात्रा ने इसकी फोटो राज्यपाल को भी दिखाई जिसे देख गर्वनर भी सन रह गई। छात्रा ने मांग की कि कुलपति लिखकर मांफी मांगें और ये वायदा करें कि भविष्य में किसी छात्रा से मारपीठ नहीं होगी।
राज्यपाल से मिली अधिवक्ता परिषद
वहीं, अधिवक्ता परिषद इकाई ने भी प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर में आम छात्रों पर लाठियां भांजने की कड़ी निंदा की। परिषद के महासचिव अधिवक्ता नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने फीस बढ़ोतरी के खिलाफ उठी आवाज को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया।
राज्यपाल से मिलकर परिषद ने इसकी जांच करवाने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की। इनका कहना है कि एससीए चुनाव पर प्रतिबंध लगाकर उनके लोकतांत्रिक अधिकार का हनन किया है। परिसर में जिस तरह से छात्रों पर लाठियां भांजी हैं उससे साफ है कि सरकार छात्रों की कितनी हितैषी है।
उन्होंने संघ की ओर से चेताया है कि यदि इन दोनों मामलों को जल्द सकारात्मक ढंग से न सुलझाया तो संघ इसको लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करेगा। कहा कि अधिवक्ता परिषद छात्र समुदाय के साथ है।
फीस बढ़ोतरी का मामला भी उठाया
विश्वविद्यालय में आम छात्रों पर बरसाईं लाठियों और फीस बढ़ोतरी, परिसर में लागू धारा 144 को हटाने अखिल भारतीय अधिवक्ता संघ की प्रदेश इकाई ने मंगलवार को राज्यपाल से मुलाकात की।
राजभवन पहुंचे अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष ओपी चौहान, सचिव निरंजन वर्मा, रविंद्र ठाकुर, संजीव भूषण, प्रवीण, मोहन और विवि की पूर्व एससीए अध्यक्ष अधिवक्ता शिखा चौहान ने राज्यपाल को विवि में आम छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और बने मौजूदा माहौल को लेकर जानकारी दी।
विवि में ताजा कोई हिंसा की घटना नहीं हुई, बावजूद इसके सरकार और विवि प्रशासन ने परिसर में धारा 144 लागू कर दी है। राज्यपाल को मांग पत्र सौंप कर बढ़ाई फीसों को वापस लेने, आम छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, धारा 144 को तुरंत हटाने की मांग की गई।
भाजपा ने भी जताया विरोध
भारतीय जनता पार्टी (शिक्षक प्रकोष्ट) के प्रदेश सजोयंक महेंद्र धर्माणी ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में बढ़ाई गई फीस का विरोध किया है। उन्होंने कहा फीस बढ़ाने का फैसला छात्र विरोधी है। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए अन्य राज्यों की अपेक्षा प्रति व्यक्ति आय कम है जिससे प्रदेश के युवाओं और विद्यार्थियों पर बढ़ी हुई फीस का बोझ नहीं उठा पाएगा।
उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने विश्वविद्यालय के वार्षिक बजट में 62 से 81 करोड़ की वृद्धि की गई लेकिन वर्तमान कांग्रेस सरकार ने विश्वविद्यालय को केवल 62 करोड़ अनुदान दिया है। ऐसे में विवि का आर्थिक संकट कैसे दूर होगा।
विवि के कर्मचारियों के वेतन को आम छात्रों की जेब से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सरकार पर छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने का भी आरोप लगाया और फीस के खिलाफ तथा एससीए चुनाव को लेकर मांग उठा रहे छात्रों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं।