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हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड: अब 35-35 फीसदी पाठ्यक्रम के आधार पर होंगी बोर्ड परीक्षाएं

Tue, 12 Oct 2021 05:00 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला

सार

बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि कार्यशाला में सभी शिक्षक संगठनों एवं शिक्षाविदों ने परीक्षा के सफल आयोजन के लिए फर्स्ट और सेकेंड टर्म की परीक्षाएं 35-35 फीसदी पाठ्यक्रम के आधार पर करवाने पर सहमति जताई है।
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हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शिक्षकों के विरोध के आगे हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड झुक गया है। बोर्ड अब 50-50 नहीं बल्कि 35-35 फीसदी पाठ्यक्रम के आधार पर परीक्षाओं का आयोजन करेगा। फर्स्ट टर्म परीक्षाएं नवंबर में ही होंगी जबकि सेकेंड टर्म मार्च की बजाय अब अप्रैल में होंगी। ये फैसले बोर्ड मुख्यालय में 23 शिक्षक संगठनों के साथ परीक्षा मूल्यांकन और मूल्यांकन सुधार के लिए हुई कार्यशाला के दौरान लिए गए हैं।

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बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि कार्यशाला में सभी शिक्षक संगठनों एवं शिक्षाविदों ने परीक्षा के सफल आयोजन के लिए फर्स्ट और सेकेंड टर्म की परीक्षाएं 35-35 फीसदी पाठ्यक्रम के आधार पर करवाने पर सहमति जताई है। इस दौरान 30 फीसदी पाठ्यक्रम बोर्ड पेपर में नहीं रहेगा। फर्स्ट टर्म का आयोजन बोर्ड की ओर से निर्धारित परीक्षा केंद्रों में स्कूलों में कार्यरत स्टाफ स्वयं करेगा। इसके लिए बोर्ड प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध करवाएगा।

प्रैक्टिकल परीक्षाओं का आयोजन सभी स्कूल अपने स्तर पर करेंगे। परीक्षा समाप्ति के बाद सभी स्कूल बोर्ड की ओर से चिह्नित किए गए ड्रॉपिंग केंद्रों पर उत्तर पुस्तिकाओं को छोड़ेंगे। उन्होंने बताया कि शिक्षकों की मांग पर नवंबर के बाद मानदेय बढ़ोतरी पर भी विचार किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि टर्म वाइज परीक्षा शुल्क का जो निर्धारण किया गया है, उसे भी 100 रुपये कम कर दिया गया है। इससे प्रदेश के दसवीं और बारहवीं के लाखों छात्रों-छात्राओं को फायदा होगा।

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बोर्ड के प्रवक्ता बन गए हैं कई अध्यापक संघ : चौहान

कई अध्यापक संघ हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के प्रवक्ता बन गए हैं। ये बोर्ड के ऐसे कार्यों के प्रति भी हामी भर रहे हैं, जिनके लिए उनका जमीर भी साथ नहीं देता। बोर्ड की ओर से शुरू की गई टर्म प्रणाली का विरोध करने के बजाय उसका समर्थन कर रहे हैं। इन्हें छात्रों और अभिभावकों के साथ हो रहे अन्याय से कोई लेना-देना नहीं है। यह बात धर्मशाला में पत्रकारवार्ता में हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा बोर्ड ने कोरोना काल में परीक्षा शुल्क में कई गुना बढ़ोतरी की है। टर्म-1 और टर्म-2 परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों को पहले से अधिक परीक्षा शुल्क देना पड़ेगा। बोर्ड के तानाशाही रवैये का नतीजा छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को भुगतना पड़ेगा।

कहा कि बीच सत्र में नई शिक्षा नीति के अंतर्गत टर्म परीक्षाओं का निर्णय तर्कसंगत नहीं है। वह मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। उन्होंने मांग की है कि परीक्षा शुल्क को कम किया जाए और टर्म परीक्षाएं अगले सत्र से शुरू की जाएं। उन्होंने कहा कि बोर्ड तीसरी, पांचवीं और आठवीं कक्षा के छात्रों से भी परीक्षा शुल्क वसूल रहा है। बोर्ड के तानाशाह रवैये के कारण 10वीं कक्षा में फर्स्ट टर्म फीस 500 रुपये, जबकि दूसरे टर्म में भी 500 रुपये परीक्षा शुल्क देना पड़ेगा। इसके अलावा 12वीं कक्षा में प्रथम टर्म में 600 और दूसरे टर्म में माइग्रेशन फीस के साथ 800 रुपये देने पड़ेंगे। नौवीं कक्षा में प्रथम टर्म में 150 व दूसरे टर्म में 150 तथा 11वीं कक्षा में प्रथम टर्म में 150 व दूसरे टर्म में 150 रुपये देने पड़ेंगे।
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