कई अध्यापक संघ हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के प्रवक्ता बन गए हैं। ये बोर्ड के ऐसे कार्यों के प्रति भी हामी भर रहे हैं, जिनके लिए उनका जमीर भी साथ नहीं देता। बोर्ड की ओर से शुरू की गई टर्म प्रणाली का विरोध करने के बजाय उसका समर्थन कर रहे हैं। इन्हें छात्रों और अभिभावकों के साथ हो रहे अन्याय से कोई लेना-देना नहीं है। यह बात धर्मशाला में पत्रकारवार्ता में हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा बोर्ड ने कोरोना काल में परीक्षा शुल्क में कई गुना बढ़ोतरी की है। टर्म-1 और टर्म-2 परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों को पहले से अधिक परीक्षा शुल्क देना पड़ेगा। बोर्ड के तानाशाही रवैये का नतीजा छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को भुगतना पड़ेगा।
कहा कि बीच सत्र में नई शिक्षा नीति के अंतर्गत टर्म परीक्षाओं का निर्णय तर्कसंगत नहीं है। वह मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। उन्होंने मांग की है कि परीक्षा शुल्क को कम किया जाए और टर्म परीक्षाएं अगले सत्र से शुरू की जाएं। उन्होंने कहा कि बोर्ड तीसरी, पांचवीं और आठवीं कक्षा के छात्रों से भी परीक्षा शुल्क वसूल रहा है। बोर्ड के तानाशाह रवैये के कारण 10वीं कक्षा में फर्स्ट टर्म फीस 500 रुपये, जबकि दूसरे टर्म में भी 500 रुपये परीक्षा शुल्क देना पड़ेगा। इसके अलावा 12वीं कक्षा में प्रथम टर्म में 600 और दूसरे टर्म में माइग्रेशन फीस के साथ 800 रुपये देने पड़ेंगे। नौवीं कक्षा में प्रथम टर्म में 150 व दूसरे टर्म में 150 तथा 11वीं कक्षा में प्रथम टर्म में 150 व दूसरे टर्म में 150 रुपये देने पड़ेंगे।