हिमाचल हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं पर लगाए जाने वाले सर्विस टैक्स पर रोक लगा दी है।
हिमाचल हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं पर लगाए जाने वाले सर्विस टैक्स पर रोक लगा दी है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार एक अप्रैल 2016 से वरिष्ठ अधिवक्ताओं पर साढ़े 14 फीसदी सर्विस टैक्स लगाया जा रहा है।
न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता रमाकांत शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं की ओर से दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद अधिसूचना के अमल पर रोक लगा दी है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब भी किया है। केंद्र सरकार ने एक मार्च 2016 को अधिसूचना जारी कर प्रावधान बनाया था कि पहली अप्रैल 2016 से वरिष्ठ अधिवक्ताओं से रिवर्स और फारवर्ड बेसिस पर साढ़े 14 फीसदी सर्विस टैक्स की वसूली की जाए।
इस वसूली का प्रावधान केंद्र सरकार ने साल 2016 के बजट के तहत किया है। एक मार्च 2016 को जारी तीन अधिसूचनाओं के अलग-अलग प्रावधानों के तहत यह टैक्स वरिष्ठ अधिवक्ताओं पर लगाया गया है।
क्या कहा याचिकाकर्ताओं ने
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके क्लाइंट्स पहले ही सर्विस टैक्स दे रहे हैं। इस अधिसूचना के कारण उनके क्लाइंट्स पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ेगा। यह व्यवस्था डबल टैक्स की श्रेणी में आ जाएगी। एक ही काम के लिए क्लाइंट्स और वरिष्ठ अधिवक्ता को अलग-अलग टैक्स देना पड़ेगा। प्रार्थियों के अनुसार यह व्यवस्था असंवैधानिक है।