हिमाचल में गैर हिमाचलियों के लिए जमीन खरीदने की प्रक्रिया को सरल किया जा रहा है। राजस्व विभाग ने भू सुधार अधिनियम 1972 के नियमों को संशोधित करने के लिए बुधवार को अधिसूचना का ड्राफ्ट जारी कर दिया। इसमें चार बड़े बदलाव किए गए हैं। उद्योगों के लिए जमीन देने की प्रक्रिया पूरी तरह बदल दी है। सिंगल विंडो में मंजूरी के बाद औद्योगिक प्रस्ताव को धारा 118 की मंजूरी के लिए उद्योग निदेशक भेजेंगे।
औद्योगिक प्लाट्स के लिए भी यही प्रक्रिया रहेगी। राज्य सरकार इस पर 15 दिन में फैसला लेगी। मंजूरी मिलने पर के संबंधित जिला के डीसी को भेजा जाएगा। डीसी को इस पर 7 दिन में फैसला लेकर सरकार को इसकी सूचना भेजनी है। इशेंसिएलिटी सर्टिफिकेट (ईसी) लेने के लिए अब 11 के बजाय केवल 7 दस्तावेज लगेंगे। इनमें प्रारंभिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट, जमाबंदी-ततीमा की प्रति, टीसीपी, वन, आईपीएच, बिजली बोर्ड से एनओसी, साइट प्लान, स्थानीय निकाय से एनओसी आदि शामिल हैं।
सरकार ने खत्म की कई बड़ी शर्तें
भू सुधार नियमों के संशोधित प्रारूप के अनुसार हिमाचल में घर या दुकान बनाने के लिए गैर हिमाचलियों को जितनी जमीन चाहिए हो, उतनी की ही मंजूरी दी जाएगी।
पहले घर के लिए न्यूनतम 500 वर्ग मीटर और दुकान के लिए 300 वर्ग मीटर जमीन की शर्त थी। अब इससे कम भी जमीन ले सकेंगे। हालांकि, धारा 118 की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
पहले सरकारी कर्मचारियों पर जमीन लेने के लिए 30 साल के सेवाकाल की शर्त थी। नए नियमों के मुताबिक अब इतना इंतजार करने की जरूरत नहीं है।
नौकरी लगते ही खरीद पाएंगे जमीन
रेगुलर नौकरी लगते ही गैर हिमाचली कर्मचारी जमीन के लिए पात्र हो जाएगा। एक और प्रावधान यह किया गया है कि मंजूरी मिलने के बाद के एक साल के भीतर जमीन का सौदा आवेदक को पूरा करना होगा।
इसमें एक्सटेंशन देने के लिए सरकार को कारण बताने होंगे। धारा 118 के तहत जमीन खरीद की मंजूरी केवल कृषि, बागवानी, उद्योग, धार्मिक, पर्यटन, बिजली प्रोजेक्ट, बीटी-आईटी प्रोजेक्ट, सामाजिक उपयोग, शैक्षणिक संस्थान और जनसुविधा के कार्यों के लिए ही दी जाएगी।
क्या है धारा 118?
भू-सुधार कानून की धारा 118 में प्रावधान है कि गैर कृषक हिमाचल में जमीन नहीं खरीद सकते। गैर हिमाचलियों को राज्य में कृषक का दर्जा नहीं है।
इसलिए प्रदेश में बाहर के लोगों को यदि निजी जमीन खरीदनी हो तो पहले धारा 118 की मंजूरी लेनी होती है। इस मंजूरी के लिए केस कैबिनेट में जाता है। धारा 118 के प्रावधानों में छेड़छाड़ राज्य में राजनीतिक मुद्दा रहा है।
प्रधान सचिव राजस्व तरुण श्रीधर का कहना है कि भू सुधार कानून के नियमों में इन संशोधनों के जरिये प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। यदि किसी व्यक्ति या संस्था को इनसे कोई आपत्ति हो, या किसी के पास कोई सुझाव हो तो 31 जुलाई तक दे सकते हैं।