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संयुक्त किसान मंच: दिल्ली की तर्ज पर शिमला में धरने पर बैठेंगे किसान-बागवान

Sun, 05 Dec 2021 07:49 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने बताया कि तीन महीने पहले प्रदेश सरकार को 15 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया था। मांगें पूरी करना तो दूर, सरकार ने बातचीत तक के लिए नहीं बुलाया। 
 
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संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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किसानों-बागवानों की मांगों को लेकर सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये के खिलाफ संयुक्त किसान मंच ने दिल्ली की तरह शिमला में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने का एलान किया है। इसके लिए 20 दिसंबर से ‘जवाब दो सरकार’ अभियान का दूसरा चरण शुरू होगा। ब्लॉक, तहसील और उपमंडल स्तर पर किसानों-बागवानों के साथ बैठकें होंगी। 

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मंच ने हर घर तक पर्चा पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। सोशल मीडिया के जरिये भी जन समर्थन हासिल किया जाएगा। इसके बाद धरना शुरू किया जाएगा, जो 2022 के विधानसभा चुनाव तक चलेगा। मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने बताया कि तीन महीने पहले प्रदेश सरकार को 15 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया था।

मांगें पूरी करना तो दूर, सरकार ने बातचीत तक के लिए नहीं बुलाया। लिहाजा, मंच की कार्यकारिणी की बैठक में सरकार के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि उपचुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ वोट के लिए जनता को जागरूक किया जाएगा।
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एपीएमसी कानून लागू नहीं करवा पाई सरकार
हरीश चौहान और संजय चौहान ने सरकार पर एपीएमसी कानून को लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। कहा है कि एपीएमसी की मंडियों में रुमाल के नीचे बोली, मनमाना लेबर चार्ज और छूट, बैंक डिमांड ड्राफ्ट कटौती और बैरियरों पर अवैध वसूली रोकने तक में सरकार फेल रही है।

इसलिए नाराज हैं किसान-बागवान
तीन माह पहले 24 अगस्त को सरकार को मांग पत्र भेजा गया था। 13 सितंबर को ब्लॉक, तहसील, उपमंडल व जिला स्तर पर प्रदर्शन हुए। 27 सितंबर को संयुक्त किसान मोर्चा के भारत बंद के आह्वान पर संयुक्त किसान मंच ने अपनी मांगों को लेकर बंद व प्रदर्शन किए। बावजूद इसके सरकार ने सुध नहीं ली। 

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