मंडी संसदीय उपचुनाव में कांग्रेस और भाजपा का केंद्रबिंदु मंडी बन गया है। नेता अपने काफिलों समेत मंडी में डेरा जमाए बैठे हैं। मंडी के अधिकांश होटल पैक हैं। आलम यह है कि सराय और गेस्टहाउस में कमरे नहीं मिल रहे हैं। दूसरी ओर शादियों का सीजन भी है। मंडी के आसपास क्षेत्रों के होटल भी पैक हैं। अगर कोई सैलानी रात बिताने के लिए मंडी में कमरा तलाशे तो उसे खासी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। चुनावी सरगर्मी के बीच पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और स्टार प्रचारकों के ठहरने के लिए जिले के होटलों में व्यवस्था की गई है।
मंडी शहर की निजी एवं धार्मिक संस्थाओं की सराय और धर्मशालाओं में भी कमरे बुक हैं। चुनावों की बढ़ रहीं गतिविधियों से होटल और ढाबा मालिकों का कारोबार चमकने लगा है। उधर, होटलियर एसोसिएशन के प्रधान मनीश सूद ने कहा कि पहले कोविड और बाद में बरसात ने पर्यटन कारोबार को प्रभावित किया। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में स्थिति अधिक बेहतर होगी। ऑक्यूपेंसी लगभग फुल चल रही है।
होटल राजमहल के प्रबंधक मान सिंह ने कहा कि मंगलवार को होटल पूरी तरह पैक रहा। चुनाव और शादियों के सीजन के चलते कमरों की एडवांस बुकिंग हो रही है। आने वाले दिनों में कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। ढाबा मालिक तपेंद्र ने कहा कि चुनावी माहौल में कारोबार ने रफ्तार पकड़ी है। पैक खाने की मांग और लागत बढ़ी है। नवरात्र में ढाबों आदि में कारोबार थोड़ा मंदा रहता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है।
मंडी में नहीं कोई पर्यटन निगम का होटल
मंडी में पर्यटन निगम के होटलों की दरकार है। जंजैहली स्थित ढीम कटारू, बड़ाग्रां और मंडी के मंडी-सुंदरनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर होटल बनकर तैयार हैं, लेकिन इनके शुरू होने का इंतजार है। इन्हें पीपीपी मोड पर चलाया जा रहा है। इसके लिए टेंडर मांगे गए हैं। पहले सरकार इन्हें पर्यटन विभाग के माध्यम से चलाना चाहती थी। इसके लिए जंजैहली स्थित होटल का जून में मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया है, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते अब इन्हें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप में चलाने का फैसला लिया गया। इसके लिए हिमाचल प्रदेश लाइव स्टाक डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से टेंडर आमंत्रित किए गए हैं।