हिमाचल सरकार शहरी निकायों में टैक्स कलेक्शन बढ़ाने और चोरी रोकने के लिए नया फार्मूला लागू करने जा रही है। शहरों में प्रापर्टी टैक्स, दुकानों का किराया और तहबाजारी टैक्स वसूलने के लिए अब आईसीआईसीआई बैंक की सेवाएं ली जाएंगी।
प्रयोग के तौर पर इस स्कीम को नगर परिषद धर्मशाला से शुरू किया जा रहा है। पहले चरण में 10 जिला मुख्यालयों के शहरी निकाय इसके दायरे में आएंगे। इन सभी शहरी निकायों में आईसीआईसीआई बैंक के क्योस्क हैं।
बैंक पहले से ही ई-टेंडरिंग गेटवे के लिए एनआईसी के साथ पंजीकृत है। बैंक ने ये प्रस्ताव भी दिया है कि जहां एटीएम, काउंटर या क्योस्क नहीं होगा, वहां बैंक अपने कॉरेस्पोंडेंट्स के माध्यम से ये सेवाएं देगा।
इस पर अभी शहरी विकास विभाग को फैसला लेना है। राज्य में करीब 50 नगर परिषदें और नगर पंचायतें हैं। इनमें गृहकर, भवन निर्माण के लिए प्लान फीस, शराब और बिजली की खपत पर सेस, प्रापर्टी ट्रांसफर करने पर सेस के अतिरिक्त आमदनी के मुख्य स्रोत प्रापर्टी टैक्स, दुकानों का रेंट और तहबाजारी टैक्स शामिल है।
शहरी निकायों में इसकी वसूली के लिए प्रशिक्षित स्टाफ नहीं है। अंदेशा है कि काम सही तरीके से न होने और टैक्स चोरी के कारण भी शहरों पर एरियर और टैक्स डिफाल्टर बढ़ते जा रहे हैं। इसका असर कितना है?
ये पता करने के लिए ये काम सीधे बैंक को दिया जा रहा है। शहरी निकायों को टैक्स अदा करने वालों की सूची बैंक को सौंपनी होगी। यदि शुरू में 10 शहरी निकायों में प्रयोग सफल रहा तो सभी शहर इस स्कीम के दायरे में आएंगे।
टैक्स भरने वालों की सूची तलब : पठानिया
शहरी विकास विभाग के निदेशक कैप्टन जेएम पठानिया का कहना है कि इस योजना के लिए शहरी निकायों से टैक्स देने वालों की सूची मांगी गई है। इसके बाद स्कीम पर फैसला होगा। यदि प्रयोग सफल रहा तो अन्य शहर भी इसके दायरे में आएंगे। हमारा मकसद टैक्स वसूली बढ़ाना है ताकि शहरी निकाय आत्मनिर्भर बनें।