सामरिक महत्व के मनाली-लेह मार्ग को बीआरओ ने एक सप्ताह में बहाल करने का लक्ष्य रखा है। सीमा सड़क संगठन के जवान बारालाचा पास से आगे बढ़ गए हैं। वहां से 15-16 किलोमीटर मार्ग से बर्फ हटाने के लिए जवानों को खूब पसीना बहाना पड़ेगा।
इस मार्ग से खुल जाने से भारतीय सेना की काफिला दनादन दौड़ना शुरू कर देगा। वहीं, चीन की सीमा पर पहरा दे रहे भारतीय सैनिकों को रसद और राशन आदि पहुंचाने में भी आसानी होगी।
इस मार्ग से सेना कम समय में कारगिल पहुंच जाएगी। 70 आरसीसी के जवान स्तींगरी से सरचू मार्ग खोलने में दिन-रात प्रयास में जुटे हैं अभी उन्हें बारालाचा पास से आगे सरचू तक 10 से 15 फीट बर्फ से जूझना पड़ेगा।
सीमा सड़क संगठन ने रोहतांग दर्रे को दो मई को यातायात के लिए बहाल कर दिया था, अब यहां से आगे लेह मार्ग बहाल करने के लिए बीआरओ ने दिन रात एक कर दिए हैं।
भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय की नजर भी मनाली लेह-मार्ग की बहाली पर टिकी है। 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान यह मार्ग अपनी सामरिक महत्ता दर्ज करवा चुका है।
सेना के अधिकारियों की मानें तो एक सप्ताह में मनाली-लेह मार्ग ट्रैफिक के लिए बहाल हो जाएगा। हालांकि, शुक्रवार को खराब मौसम होने के चलते बारालाचा पास में बर्फ के फाहे गिरे लेकिन जवानों ने अपने लक्ष्य को विराम नहीं दिया।
70 आरसीसी के कमांडिंग आफिसर एसके एंथोनी भी लेह मार्ग की बहाली में अपने जवानों के साथ मोर्चा संभाले हुए हैं। एंथोनी ने बताया कि सब कुछ ठीक रहा तो मनाली-लेह मार्ग एक सप्ताह के भीतर ट्रैफिक के लिए बहाल हो जाएगा।