हिमाचल प्रदेश कृषि एवं बागवानी यूनियन ने राज्य सरकार से भू-संरक्षण अधिनियम -1978 में संशोधन कर इसे किसान हितैषी बनाने की मांग की है। यूनियन ने कहा कि ये मामला राज्यपाल, मुख्यमंत्री और सभी विधायकों के समक्ष उन्हें ज्ञापन देकर उठाया है।
यूनियन ने प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में विधेयक पारित करने की भी मांग की। वर्ष 1980 में लागू किए गए इस अधिनियम में संशोधन के अलावा यूनियन ने वर्ष 1968 की नौतोड़ भूमि नीति को भी लागू करने को कहा है। यूनियन के अध्यक्ष केएन शर्मा और महासचिव बीआर शर्मा ने शुक्रवार को शिमला के प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता में कहा है कि भू-संरक्षण अधिनियम -1978 की धाराएं किसानों पर भारी पड़ रही हैं।
जैसे धारा-चार के तहत बंजर भूमि को तोड़ना, खोदना, पत्थर-चूना निकालना, वृक्ष काटना और पशुओं को चराना वर्जित है। ये सारे प्रतिबंध होने से किसानों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसके अलावा उनके पुराने समय के कब्जे आज अवैध हो गए हैं और उन पर कार्रवाई हो रही है। केएन शर्मा ने कहा कि यूनियन चाहती है कि प्रदेश के कम भूमि वाले किसानों के पांच से दस बीघा तक के अनधिकृत कब्जों को वैध किया जाए।
हाईकोर्ट के मौजूदा आदेशों पर सरकारी स्तर पर केवल गरीबों पर ही कार्रवाई की जा रही है। जो अमीर कब्जाधारी हैं, उन्हें कोई पूछ भी नहीं रहा। वे मौजूदा समय में भी कब्जे कर रहे हैं। अगर अधिनियम में संशोधन होगा और नौतोड़ नीति को लागू किया जाएगा तो गरीबों की बड़ी समस्या हल हो जाएगी। इस अवसर पर यूनियन के अन्य पदाधिकारी केएन शर्मा, महेंद्र प्रताप चंदेल, हीरालाल शर्मा, अब्दुल मजीब और कृष्णलाल शर्मा भी मौजूद हुए।