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पीने के पानी से बुझ रही कूड़े की आग, शहर में पेयजल संकट

Sat, 20 Feb 2016 10:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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शिमला शहर में पेयजल की राशनिंग के बीच एमसी की अजीबोगरीब कार्यप्रणाली सामने आई है। भरयाल स्थित कूड़ा संयंत्र में तीन दिन से भड़की आग को बुझाने के लिए पीने का पानी प्रयोग किया जा रहा है। शहर के लोग पेयजल किल्लत झेल रहे हैं, वहीं यहां हर रोज हजारों लीटर पानी आग बुझाने के काम लाया जा रहा है। यहां रोजाना हजारों लीटर पानी रिज टैंक से ले जाकर आग पर डाला जा रहा है।
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प्लांट में तीन दिन से अग्निशमन विभाग के करीब 37000 लीटर क्षमता के पांच वाटर टेंडर बारी- बारी रिज के टैंक से पेयजल ले जा कर कूड़े में भड़की आग पर फेंक रहे हैं। 25 जवान तीन बीघा क्षेत्र में फैली आग को बुझाने में कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। कूड़े से उठ रही दुर्गंध और जान जोखिम में डाल कर मुंह पर मास्क लगाकर कर्मियों को आग बुझाने के लिए पसीना बहाना पड़ रहा है।

इस ऑपरेशन के अभी अगले दो दिन तक पूरा होने की उम्मीद भी कम है। दो दिन भी पानी इसी तरह से बर्बाद होगा। नगर निगम को चाहिए कि कूड़े की आग को बुझाने को किसी अन्य जगह से पानी पहुंचाने की व्यवस्था करे, ताकि रिज के टैंक के लिफ्ट कर गिरी तथा अन्य परियोजनाओं से आने वाले पानी को सिर्फ और सिर्फ शहर की पेयजल आपूर्ति में किया जाए।
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संयंत्र में भड़की आग को काबू पाना हुआ मुश्किल
शुक्रवार को भी मुख्य अग्निशमन अधिकारी भुपाल सिंह चौहान, डीएफओ डीडी शर्मा, जेसी शर्मा, माल रोड स्टेशन आफिसर मदन लाल ठाकुर, सब फायर आफिसर संजीव कुमार मौके पर पहुंचे थे। सीएफओ ने कहा कि आग बुझाने के प्रयास जारी है, मगर आग इतनी गहरी है कि कब तक बुझेगी कुछ नहीं कहा जा सकता। नगर निगम के सहायक आयुक्त प्रशांत सरकैक का कहना है कि अश्वनी खड्ड से पानी लाना काफी मुश्किल है। यह बहुत दूर पड़ जाएगा। समय की बर्बादी होगी। आग को लेकर पुलिस में एफआईआर दर्ज करवा दी गई है।

ब्रांडी और बीन नाला से जल्दी उठाओ पीनेका पानी: स्टोक्स
शिमला में पीने के पानी की किल्लत को दूर करने के लिए आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स ने शुक्रवार को राज्य सचिवालय में सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की एक बैठक ली। इस अवसर पर स्टोक्स ने नगर निगम शिमला के महापौर संजय चौहान और उप महापौर टिकेंद्र सिंह पंवर से भी चर्चा की। स्टोक्स ने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जल्दी इन नालों से शिमला के लिए पानी उठाएं।

स्टोक्स ने शुक्रवार को हुई इस बैठक में सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे शिमला में पेयजल की कमी के मामले को गंभीरता से लें। उन्होंने इस अवसर पर अधिकारियों से ये भी जानना चाहा कि शिमला शहर के सभी हिस्सों में अभी तक कितना पानी जा रहा है। इस अवसर पर अधिकारियों ने उन्हें बताया कि अश्वनी खड्ड में मिलने वाले ब्रांडी और बीन नाला का पानी पीने योग्य हो सकता है।

इन नालों से पानी उन जगहों से उठाया जा सकता है, जहां से ये सीवरेज या गंदे पानी से दूषित नहीं हो रहा है। इस पानी के नमूनों की विभिन्न स्तरों पर जांच की जा रही है। अगर इनसे पानी उठाया जाता है तो शिमला शहर के पेयजल से वंचित हिस्सों या कम पेयजल प्राप्त करने वाले भागों में भी उचित आपूर्ति की जा सकती है।

अधिकारियों ने बताया कि इन नालों से पानी उठाने को तीन करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। काम तेजी से चल रहा है। नगर निगम शिमला के महापौर संजय चौहान और उपमहापौर टिकेंद्र सिंह पंवर ने इससे पूर्व स्टोक्स से अनुरोध किया कि आईपीएच विभाग विभिन्न स्रोतों से शिमला शहर के सभी भागों के लिए शुद्ध पानी की व्यवस्था करे, जिससे नगर निगम लोगों तक इसे पहुंचा सके।
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