नाम : भवानी सिंह पठानिया
आयु : 47 वर्ष
जन्म स्थल : धर्मशाला
शिक्षा : बीकॉम, एमबीए
अनुभव : 1998 में बलसारा कंपनी में मैनेजमेंट ट्रेनी से करियर शुरू किया
जीई, एसबीआई, पीएनबी मेटलाइफ, आईसीआईसीआई ग्रुप में 23 वर्ष का अनुभव
इस साल पिता की मृत्यु के बाद आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल में एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट के पद से इस्तीफा देकर राजनीति में आए
नौकरी के साथ पिता के चुनाव में पिछले 20 साल से सक्रिय थे
कांग्रेस के अर्की से प्रत्याशी संजय अवस्थी।
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नाम : संजय अवस्थी
जन्म तिथि : 07 अक्तूबर 1963
जन्म स्थान : सोलन
शिक्षा : एमए, हिमाचल प्रदेश विवि
राजनीतिक पद : प्रदेश कांग्रेस महासचिव
खेल : रणजी ट्रॉफी खिलाड़ी(1989-90 तक)
निवास : गाहर, पीओ बातल, तहसील अर्की, जिला सोलन।
परिवार : सामान्य
कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिभा सिंह(फाइल)
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प्रतिभा सिंह 1998 में सक्रिय राजनीति में आई थीं। पहला चुनाव इसी संसदीय क्षेत्र से लड़ा था, जब भाजपा के महेश्वर सिंह ने उन्हें करीब सवा लाख मतों से पराजित किया था। महेश्वर सिंह उनके समधी हैं। 1998 में केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी थी। सरकार 13 माह ही चल पाई थी। 1999 में लोकसभा का दोबारा चुनाव हुआ था। प्रतिभा सिंह ने यह चुनाव नहीं लड़ा था। 2004 के आम लोकसभा चुनाव में उन्होंने दूसरी बार अपनी किस्मत आजमाई थी। समधी महेश्वर सिंह से 1998 की हार का बदला लेकर वह पहली बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुई थीं। 2009 का लोकसभा चुनाव उनके वीरभद्र सिंह ने लड़ा था।
2012 में प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद वीरभद्र सिंह ने लोकसभा से त्यागपत्र दे दिया था। 2013 में उपचुनाव हुआ तो प्रतिभा तीसरी बार मैदान में उतरीं। वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को करीब 1.39 लाख मतों से शिकस्त देकर दूसरी बार संसद सदस्य निर्वाचित हुई थीं। इसके साल भर बाद 2014 में लोकसभा चुनाव हुआ था। मोदी लहर में भाजपा के रामस्वरूप शर्मा ने उन्हें 39 हजार से अधिक मतों से पराजित किया था। प्रदेश में उस समय कांग्रेस सरकार थी। प्रतिभा सिंह की हार से सब दंग रह गए थे। करीब सात साल बाद प्रतिभा सिंह दोबारा चुनावी अखाड़े में उतरी हैं।
कांग्रेस प्रत्याशी रोहित ठाकुर
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रोहित ठाकुर का जन्म 14 अगस्त 1974 को हुआ। रोहित जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र की जुब्बल तहसील की ग्राम पंचायत धार के पौटा गांव के निवासी हैं। उन्होंने स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त की। राजनीति रोहित ठाकुर को अपने दादा पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल से विरासत में मिली। वर्ष 2002 में दादा के निधन के बाद रोहित ठाकुर ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। रोहित ने पहली बार वर्ष 2003 में चुनाव लड़ा और जीत प्राप्त की।
उस वक्त उनकी 27 साल की उम्र थी। इससे पूर्व युवा कांग्रेस में सक्रिय थे। इसके बाद 2012 में चुनाव जीता। वीरभद्र सरकार में रोहित ठाकुर मुख्य संसदीय सचिव भी रह चुके हैं। रोहित ठाकुर को अब तक अपने राजनीतिक जीवन में दो बार जीत और दो बार हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस के टिकट पर उनका मुकाबला हमेशा भाजपा नेता नरेंद्र बरागटा से ही रहा। उन्होंने डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ से बीए राजनीति विज्ञान की शिक्षा ग्रहण की।