हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट समेत तीन विधानसभा क्षेत्रों में हुए उपचुनाव के नतीजे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का कद नापेंगे। अकेले मंडी में जीते तो भी जयराम प्रदेश के कद्दावर नेता के रूप में उभरेंगे। वरना चुनावी साल से पहले विरोधियों के निशाने पर रहेंगे। पहली बार जयराम ने केंद्र के बडे़ नेताओं जैसे मोदी, शाह, नड्डा की गैर मौजूदगी में उपचुनाव लड़े हैं। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ही स्टार प्रचारकों की सूची में शुमार रहे।
प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी मुख्यमंत्री के कार्यकाल में एक साथ चार सीटों पर उपचुनाव हुए हैं। कोविड और महंगाई जैसे देशव्यापी चुनौतियों से जूझती सरकार के लिए उपचुनाव बड़ी चुनौती बने हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने भी उपचुनाव को जीतने का सारा दारोमदार मुख्यमंत्री पर डाल दिया है। अकेले अनुराग के अलावा स्टार प्रचारकों की सूची में अन्य केंद्रीय नेताओं को शामिल न करने से यह बात साफ हो गई थी कि मुख्यमंत्री जयराम को उपचुनाव में अग्नि परीक्षा देनी होगी।
करीब चार साल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के लिए दो साल कोविड से निपटने में गुजर गए। ऐसे में विकास कार्यों का प्रभावित होना स्वाभाविक रहा। इस बार मोदी लहर भी पिछले लोकसभा चुनाव की तरह नहीं है। इसमें भाजपा ने प्रदेश की हर सीट पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया था। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मुख्यमंत्री अगर उपचुनाव में भाजपा का पलड़ा भारी रखते हैं तो यह उनके कद को और ऊंचा कर देगा।
हालांकि, जुब्बल-कोटखाई और फतेहपुर में बागी भाजपा के समीकरण बिगाड़ते नजर आ रहे हैं। अर्की में भितरघात की वजह से कांटे की टक्कर है। मंडी उपचुनाव में तो जयराम ठाकुर में आस्था और वीरभद्र परिवार के प्रति भावना ही बड़े मुद्दे रहे हैं। अगर जयराम मंडी लोकसभा सीट को चूकते हैं तो इससे उनकी भविष्य की राजनीति की नई दशा और दिशा तय होगी। अगर भाजपा कांग्रेस से आगे रहती है तो सीएम बाहर-भीतर के सब विरोधियों की बोलती बंद कर देंगे।