विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने सर्वदलीय बैठक में सत्तापक्ष तथा प्रतिपक्ष के सभी सदस्यों से सत्र के संचालन में रचनात्मक सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि वह अपने दायित्व से पूरी तरह वाकिफ हैं। उन्होंने सभी सदस्यों से अनुरोध किया कि वे सत्र के संचालन में अपना भरपूर सहयोग दें और समय का सदुपयोग जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए करें। उन्होंने कहा कि लोकसभा तथा विधानसभा लोकतंत्र के मंदिर हैं और हिमाचल प्रदेश विधानसभा की अपनी एक उच्च परंपरा व गरिमा है। बैठक में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री, विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. हंस राज, मुख्य सचेतक बिक्रम सिंह जरयाल, उपमुख्य सचेतक कमलेश कुमारी, विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के चीफ जगत सिंह नेगी तथा विधानसभा सचिव यशपाल शर्मा मौजूद थे।
सीधे मंत्रियों से नहीं मिलेंगे प्रतिनिधिमंडल
विधानसभा सत्र के दौरान लोग सीधा मंत्रियों से नहीं मिल पाएंगे। प्रतिनिधिमंडलों से मिलने के लिए मंत्रियों ने अपने प्रतिनिधि नियुक्त किए हैं। मंत्री इन नियुक्त प्रतिनिधियों को दाड़ी मैदान भेजेंगे। यहां पर प्रतिनिधिमंडल मंत्रियों के प्रतिनिधियों को अपने मांग पत्र सौंपेंगे। मंत्री पत्र पर अपनी स्वीकृति देकर मिलने का समय व स्थान निर्धारित करेंगे। इस प्रक्रिया के बाद ही प्रतिनिधिमंडल मंत्रियों से मिल सकेंगे।
शीत सत्र में इस बार विपक्ष के साथ-साथ सत्तापक्ष के विधायक भी सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। सत्र के पहले ही दिन शुक्रवार को इस पर चर्चा होनी है। सत्ता पक्ष के तीन विधायकों ने ऐसे विषयों पर चर्चा मांगी है, जिनसे जयराम सरकार सदन के अंदर असहज हो सकती है। इससे विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका मिल सकता है। भाजपा विधायक रीता धीमान ने शूगर मिल न होने से इंदौरा क्षेत्र के गन्ना किसानों को अपनी उपज बेचने में आ रही समस्याओं पर नियम 62 के तहत चर्चा मांगी है।
नरेंद्र ठाकुर और जीतराम कटवाल ने सड़कों के रखरखाव पर चर्चा मांगी है। चूंकि उपचुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद पहले से ही कांग्रेस विधायक दल के सदस्य सरकार को घेरने के लिए तैयार बैठे हैं। जयराम सरकार अपने पांचवें साल में इसी महीने कदम रख रही है। ऐसे में सत्ता पक्ष के विधायकों के इस तरह की चर्चाएं मांगने पर विपक्ष को बैठे-बिठाए सदन में सरकार को घेरने का मुद्दा हाथ लग सकता है।