केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को दी जाने वाली पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में कई बदलाव कर दिए हैं। अब पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति आवेदन के साथ ही निजी शिक्षण संस्थान की फीस स्लिप भी देनी होगी। छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने जिन कोर्सों में दाखिले लिए हैं, उस कोर्स में कुल कितनी सीटें हैं। इसकी जानकारी भी देनी होगी। कोरोना संकट के कारण सरकार ने विद्यार्थियों को बायोमीट्रिक हाजिरी से छूट दे दी है।
हालात ठीक होने तक रजिस्ट्रर पर ही रोजाना हाजिरी लगाने के लिए कहा गया है। उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में किए गए बदलावों को लेकर निर्देश जारी कर दिए हैं। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि निजी और सरकारी शिक्षण संस्थानों में दाखिलों के समय ही नेशनल स्कालरशिप पोर्टल पर छात्रवृत्ति लेने के लिए विद्यार्थियों का पंजीकरण करवाना होगा।
एनएसएस स्वयंसेवियों की मदद से दसवीं और बारहवीं कक्षा पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ देने वाले अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा लेने के लिए तलाशा जाएगा। इन विद्यार्थियों की पढ़ाई में अगर एक से दो साल का अंतर भी होगा तो भी इन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
निदेशालय ने शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति लेने वाले हर विद्यार्थी का रिकार्ड बनाने को भी कहा गया है। इसके लिए विशेष कमेटी बनाने और परामर्श के लिए विशेष केंद्र भी परिसरों में बनाने को कहा गया है। शिक्षण संस्थानों की ओर से सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही आवेदन नेशनल पोर्टल पर अपलोड करने होेंगे। वार्षिक आय के प्रमाणपत्र अभिभावकों के नाम पर होने चाहिए। विद्यार्थियों के नाम पर यह प्रमाणपत्र स्वीकार नहीं होंगे। जाति, आय और मेरिट के दस्तावेजों को आधार नंबर के साथ लिंक कर डिजिटल तौर पर भी संस्थानों को अपने पास रखना अनिवार्य किया गया है।