बहुचर्चित फर्जी डिग्री मामले में फंसे मानव भारती विश्वविद्यालय की जांच में हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब फोरेंसिक ऑडिट शुरू हो गया है। प्रदेश पुलिस ने ऑडिट के लिए दो ऑडिटरों को नियुक्त कर दिया है। करीब डेढ़ साल पहले हाईकोर्ट ने ऑडिट कराने के आदेश दिए थे लेकिन ऑडिटरों की नियुक्ति के लिए फाइल गृह विभाग में घूमती रही।
कोर्ट ने आदेश सरकार को दिए थे कि वह ऑडिट कराए, जबकि विभाग का कहना था कि चूंकि जांच एजेंसी ही जांच कर रही है, इसलिए वही मामले में ऑडिटरों की भी नियुक्ति करे। ऑडिट करने वालों को पैसे देने को लेकर भी पेंच फंसा हुआ था।
अब यह मसला सुलझने और गृह विभाग के पल्ला झाड़ने के बाद पुलिस ने ऑडिटरों की नियुक्ति कर फोरेंसिक ऑडिट की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार फारेंसिक ऑडिट में पुलिस और सीआईडी की एसआईटी में मिले जितने भी साक्ष्य थे, उनका अलग से ऑडिट होगा। इससे न सिर्फ मानव भारती विश्वविद्यालय के वित्तीय गड़बड़झाले की एक बार और तफ्तीश हो जाएगी, बल्कि यह भी पता चल जाएगा कि इनकम टैक्स व अन्य विभागों को दिए कर व लेनदेन और उनके दस्तावेजों में दर्ज ब्योरे में काई भिन्नता तो नहीं है।
अगर कुछ गड़बड़ी मिलती है तो उसे जांच कर रही एसआईटी अपनी तफ्तीश में शामिल कर लेगी। अब तक की जांच में करीब 45 हजार फर्जी डिग्रियों का पता लगाया जा चुका है। वहीं, विश्वविद्यालय का मालिक राज कुमार राणा जेल में है, जबकि उसकी पत्नी और बच्चों को ऑस्ट्रेलिया से हिमाचल लाने के लिए विदेश मंत्रालय की मदद से कवायद की जा रही है।