राजधानी का डाउन डेल एरिया आपराधिक किस्म के लोगों का आश्रय स्थल बनता जा रहा है। यहां कुष्ठ रोगियों को बसाने के लिए सरकार ने जमीन देकर उन्हें बसाया था लेकिन इसके इर्द गिर्द सरकारी भूमि पर बाहरी राज्यों से आए लोगों ने कब्जा कर अपनी बस्तियां बना लीं।
सरकारी महकमों की नालायकी की वजह से बस्ती का विस्तार होता रहा और कब्जाधारियों की झुग्गियां बढ़ती गईं। यही नहीं यह झुग्गियां किराये पर भी चढ़ा रखी हैं। सरकारी महकमों ने आज तक इस जगह को खाली करने की जहमत तक नहीं उठाई। हालांकि बस्ती में कुछ शरीफ लोग भी रहते हैं लेकिन पुलिस के रिकार्ड में दर्ज केसों से बस्ती बदनाम हो चुकी है।
वोटों की राजनीति की वजह से भी डाउन डेल खूब फल फूल रहा है। इन पर हाथ डालने की पहल करने वालों को अपना वोट बैंक खिसकने का खतरा महसूस होता है। ऐसी रहस्यमयी चुप्पी ने आम जनता की सुरक्षा को ताक पर रख दिया है। पुलिस में दर्ज आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो पांच साल में डाउन डेल में रहने वाले 68 लोगों के खिलाफ शहर के विभिन्न थानों में दर्जनों आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
इनमें महिलाएं भी शामिल हैं। इन पर चरस और शराब की तस्करी, हत्या के प्रयास का मामला और चोरी जैसे संगीन अपराध शामिल हैं। इनमें से कई केेसों में आज भी पुलिस को इनकी तलाश है लेकिन इनके बाहरी राज्यों में भी ठिकाने हैं।
शिमला में कोई बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने के बाद यहां से फरार हो जाते हैं। मामला शांत होने के बाद लौट आते हैं। शिमला के अलावा इनके दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा आदि राज्यों में भी ठिकाने हैं। इसी तरह दूसरे राज्यों में भी किसी वारदात को करने के बाद यहां आश्रय ले लेते हैं।
डाउन डेल में आम आदमी तो क्या पुलिस भी यहां का रुख नहीं कर पाती। यहां कुछ लोगों ने कुत्ते पाल रखे हैं, किसी बाहरी आदमी के यहां दाखिल होने पर कुत्ते छोड़ देते हैं। इस रहस्यमयी बस्ती के भीतर ऐसा क्या है कि यहां किसी के प्रवेश पर डाउन डेल निवासी अपनी आजादी में खलल मानते हैं।
यहां आने वाले व्यक्तियों को जल्द से जल्द डाउन डेल की सीमा से बाहर करने के लिए हर जुगत लगाने से पीछे नहीं हटते। पुलिस भी इस बात को दबी जुबान में स्वीकार करती है। यहां जुआ, तस्करी और स्मैक जैसे नशीले पदार्थ बिकते हैं।
एएसपी सिटी भजन देव नेगी ने कहा कि डाउन डेल सरकारी भूमि पर बना है। लोगों सरकारी भूमि पर कब्जा जमा रखा है। यहां रहने वाले दर्जनों लोगों के खिलाफ शहर के विभिन्न थानों में आपराधिक मुकदमे दर्ज है। सरकारी भूमि पर कब्जा छुड़ाना पुलिस का काम नहीं है।
यह नगर निगम की जिम्मेदारी है अगर उन्हें इसके लिए पुलिस बल की जरूरत है तो वह तुरंत उपलब्ध करवाएंगे। लेकिन आज तक उनकी ओर से ऐसा कोई आग्रह पत्र नहीं आया है।
नगर निगम आयुक्त पंकज राय ने कहा कि डाउन डेल में एमसी के कर्मचारी जाकर निरीक्षण करेंगे। यदि यहां कब्जे पाए गए तो उन्हें तुरंत हटाया जाएगा। इसमें अगर जरूरत होगी तो पुलिस की मदद ली जाएगी।