हिमाचल सरकार में केवल पैतृक संपत्ति पर ही टीडी (टिंबर डिस्ट्रीब्यूशन) अधिकार मिलेंगे। राज्य सरकार ने इमारती लकड़ी के आवंटन नियम संशोधित किए हैं। अगर खुद जमीन खरीदी हो तो ये अधिकार नहीं मिलेंगे। अगर किसी व्यक्ति की दो जगहों पर टीडी के अधिकार से युक्त जमीनें हैं तो उसे वास्तविक निवास स्थान पर एक ही जगह ये अधिकार मिलेंगे। बेशक कृषि योग्य भूमि की खरीद क्यों न की हो।
नियमों में यह व्यवस्था भी जोड़ी गई है कि केवल सूखे खडे़ और गिरे हुए पेड़ ही टीडी के तहत दिए जाएंगे। राज्य सरकार ने इसकी अधिसूचना मंगलवार को जारी की है। राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश वन अधिकार धारकों के इमारती लकड़ी वितरण नियम संशोधित कर यह व्यवस्था की है कि जिसके पास केवल विरासत से अर्जित कृषि योग्य भूमि है, उसे ही टीडी अधिकार मिलेंगे। संबंधित क्षेत्र की बंदोबस्त रिपोर्ट में अधिकारधारक को ही ये अधिकार दिए जाते हैं।
वास्तविक घरेलू उपयोग के लिए आवासीय मकान, गौशाला आदि के निर्माण, मरम्मत, जीर्णोद्धार आदि के लिए इमारती लकड़ी प्रदान की जाएगी। कोई भी व्यक्ति जिसने राजस्व संपदा से बाहर से बसने के लिए आवास के निर्माण, कृषि या किसी अन्य कार्य के लिए भूमि की खरीद की हो, वह इमारती लकड़ी का हकदार नहीं होगा। अगर कोई व्यक्ति टीडी में मिली लकड़ी को कहीं अन्यत्र इस्तेमाल कर अधिकारों का उल्लंघन करता है तो उसके अधिकार अगले बीस साल के लिए निलंबित किए जाएंगे।