दिवाली पर ड्राई फ्रूट्स गिफ्ट करने के लिए ढीली करनी होगी जेब
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दिवाली के लिए ड्राईफ्रूट्स के पैक गिफ्ट मिल रहे महंगे, बादाम 12 सौ रुपये किलो
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काजू बिक रहा एक हजार रुपये प्रतिकिलो
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। दिवाली पर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को ड्राई फ्रूट्स के गिफ्ट पैक देने के लिए शहरवासियों को जेब ढीली करनी पड़ेगी। बादाम, काजू, पिस्ता समेत ज्यादातर ड्राई फ्रूट्स के रेट एक हजार रुपये प्रति किलो से भी ज्यादा पहुंच गए हैं। ऐसे में इनसे बने गिफ्ट पैक भी महंगे मिल रहे हैं।
शहर के बाजारों में ड्राई फ्रूट्स के गिफ्ट पैक की हर साल भारी मांग रहती है। मिलावटी मिठाइयों की जगह लोग ड्राई फ्रूट्स के गिफ्ट पैक एक दूसरे को देते हैं। लेकिन इस बार महंगाई की मार पड़ रही है। हालत यह है कि इनसे बने गिफ्ट पैक से बादाम, काजू, अंजीर, पिस्ता आदि घटने लगे हैं। इनकी जगह पैक में छुहारे, मिश्री, ड्राई खुमानी, अखरोट गिरी आदि भरे जा रहे हैं। ज्यादातर कारोबारी ऑन डिमांड भी गिफ्ट पैक तैयार कर रहे हैं। कारोबारियों के मुताबिक बाजारों में बादाम के रेट 900 रुपये से लेकर 1200 रुपये किलो तक है। काजू और पिस्ता के रेट 1000 रुपये प्रति किलो के आसपास है।
अंजीर 1200 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। अफगानिस्तान से ड्राई फ्रूट्स की सप्लाई न मिलने और दिवाली पर अचानक मांग बढ़ने से इनके रेट इस बार ज्यादा है। बीते साल बादाम के रेट 700 से 800 रुपये थे जबकि काजू और अंजीर भी 900 रुपये प्रति किलो से कम थे। अनाज मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक श्रीधर ने बताया कि इस बार ड्राई फ्रूट्स के रेट ज्यादा हैं।
पैक गिफ्ट पड़ रहा महंगा
दुकानों पर बने गिफ्ट पैक काफी महंगे हैं। इन गिफ्ट पैक में बादाम 1200, काजू 1400 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। हर पैक में 100 ग्राम से लेकर 300 ग्राम तक के ड्राई फ्रूट्स बिक रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार इस बार ड्राई फ्रूट्स के तीन सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक के गिफ्ट पैक बिक रहे हैं। अखरोट, खुमानी, मिश्री, छुहारे, मनक्का आदि के पैक इससे सस्ते हैं।
800 रुपये में लग रही हाथों की मेंहदी
करवाचौथ पर सजना संवरना महिलाओं के लिए महंगा पड़ रहा है। शहर के बाजारों में मेंहदी लगाने के ही अलग अलग रेट है। रिज और टका बैंच के पास दोनों हाथों में दोनों तरफ से मेंहदी लगाने के 800 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
मालरोड, लोअर बाजार में 300 से 400 रुपये लिए जा रहे हैं। बिना अनुमति मालरोड पर भी कई लोगों ने मेंहदी लगाने के लिए दुकानें सजा रखी हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन इनकी रेट लिस्ट तक चेक नहीं कर रहा।