जापान सरकार के खर्चे पर जापान गए 40 शिक्षकों के दौरे पर विवाद हो गया है। विभिन्न शिक्षक संघों ने इस दौरे को एजूकेशन टूअर न बताकर इसे घूमने के उद्देश्य तैयार किया एक सामान्य दौरा बताया है। इतना ही नहीं, चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।
शिक्षा विभाग पर जापान सरकार के इस टेक्निकल कारपोरेशन प्रोग्राम के बारे में सूचना को छुपाने का भी आरोप है। ऊना, कांगड़ा, सोलन, शिमला, मंडी, सिरमौर, किन्नौर, लाहौल-स्पीति सहित अन्य जिलों के उप निदेशकों को टेक्निकल कारपोरेशन प्रोग्राम के बारे में सूचना ही नहीं दी गई।
प्रदेश शिक्षक महासंघ ने मामले को केंद्र सरकार से उठाने का निर्णय कर उच्च स्तरीय जांच की मांग करने का फैसला किया है। शीघ्र महासंघ एमएचआरडी मंत्रालय से संपर्क कर शिकायत के लिए खाका तैयार करेगा। शिक्षा विभाग ने प्राइमरी एजूकेशन में शिक्षा का स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से 40 शिक्षकों को 45 दिन की ट्रेनिंग के लिए जापान भेजा।
ये शिक्षक जापान में प्राइमरी स्तर पर मुख्यतया दो विषयों मैथ और साइंस को पढ़ाने के तरीके सीखेंगे। जापान सरकार के टेक्निकल कारपोरेशन प्रोग्राम के तहत इन्हें भेजा गया है। शिक्षक 15 नवंबर तक जापान में रहेंगे।
शिक्षा विभाग ने जिलों में उप निदेशकों को जानकारी ही नहीं दी। ऊना में भी किसी को जानकारी नहीं थी। शिक्षकों के जाने और उनके चयन के बाद ही यात्रा के संबंध में जानकारी मिली। दौरे में उन्हें भेजा गया, जो पढ़ाते ही नहीं हैं। ऐसे में उन्हें भेजने और नहीं भेजने का औचित्य ही खत्म हो जाता है। जो शिक्षक शिक्षा के लिए कार्य कर रहे हैं, उन्हें भेजते तो कम से कम शिक्षा के स्तर में फर्क आता।
- विनय शर्मा, अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ ऊना
जापान दौरे पर उन शिक्षकों को नहीं भेजा गया, जिन्हें भेजना चाहिए था। जिनकी चलती है, उन्हीं को भेजा गया। इससे शिक्षा में क्या और कैसा सुधार होगा, इसका जवाब तो शिक्षा विभाग ही दे सकता है। केंद्र सरकार से शिकायत कर उच्च स्तरीय जांच की मांग की जाएगी। यह तो शिक्षा, शिक्षकों और बच्चों के साथ धोखा है।
- डा. मामराज पुंडीर, प्रवक्ता, हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ