हिमचल के जिला सोलन के सायरी क्षेत्र में पीलिया की चपेट में आई एक कालेज छात्रा की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि छात्रा का कुछ अरसे से आईजीएमसी में इलाज चल रहा था। वीरवार को पीड़ित छात्रा ने दम तोड़ दिया। सोलन में पीलिया से यह पहली मौत है।
शिमला में इससे पहले दो लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है। उधर सोलन में वीरवार को कुल 17 पीलिया के नए मामले सामने आए हैं। जबकि जिला में पीलिया से पीड़ितों की संख्या 200 से अधिक हो चुकी है। छात्रा की मौत की पुष्टि बीएमओ सायरी डा एनके गुप्ता ने की है।
उन्होंने कहा कि जल्द छात्रा कि केस हिस्ट्री खंगाली जाएगी। जिला सोलन में गंदे पानी के सेवन से पीलिया दिनोदिन बढ़ रहा है। सोलन शहर के अलावा नालागढ़, परवाणू और बद्दी से भी मामले सामने आ चुके हैं। अब कंडाघाट क्षेत्र में भी पीलिया पांव पसारने लगा है।
जांच का सामना कर रहे चीफ इंजीनियर को भी पीलिया
पुलिस जांच के दायरे में आने के बाद अब आईपीएच शिमला जोन के चीफ इंजीनियर पीलिया की चपेट में आ गए हैं। चीफ इंजीनियर आरएम मुकुल को गंभीर अवस्था में वीरवार शाम चार बजे आईजीएमसी अस्पताल लाया गया। इन्हें अस्पताल के स्पेशल वार्ड में भर्ती किया गया है।
इनके अलावा शासन में बैठे कई आला अफसर भी पीलिया की चपेट में आ चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक मुकुल की हालात काफी गंभीर है। अस्पताल में चिकित्सकों की देखरेख में इनका उपचार चल रहा है। अभी तक आईएएस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी तक इस रोग की चपेट में आ चुके हैं।
आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश ने पुष्टि करते हुए बताया कि मुकुल पीलिया से पीड़ित हैं और इनका उपचार चल रहा है। उधर, सर्विंलेस ऑफिसर डॉ. राकेश रोशन भारद्वाज ने बताया कि वीरवार को राजधानी में पीलिया के 21 नए मामले सामने आए हैं।
ठेकेदार को भी पीलिया
शहर में पीलिया फैलने के मामले का मुख्य आरोपी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ठेकेदार अक्षय डोगर भी पीलिया की चपेट में आ गया है। इनका भी उपचार चल रहा है। इनके अलावा आईएएस अफसर प्रियतु मंडल, हेल्थ रेगुलेटरी कमीशन के निदेशक रामेश्वर शर्मा, अतिरिक्त सचिव सामान्य प्रशासन अश्विनी शर्मा और रिटायर्ड आईएएस बीएम नैंटा को भी पीलिया हो गया है।
पीलिया पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मेयर से जवाब तलब
पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और एमसी के मेयर को शिमला पुलिस ने पीलिया के मामले को लेकर 20 सवालों की प्रश्नावली भेजी है। इसमें मुख्य तौर पर यह पूछा है कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर बोर्ड की ओर से कब-कब और क्या-क्या कार्रवाई की गई?
सैंपल फेल को लेकर भी सवाल किए हैं? बोर्ड की ओर से इस बारे में जवाब मिलने के बाद एसआईटी अगला कदम उठाएगी। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की निगरानी को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सवालों के घेरे में हैं। हालांकि बोर्ड की ओर से सैंपल फेल होने की जानकारी लगातार आईपीएच महकमे को दी गई है इसके लिए नोटिस भी जारी किए हैं।
बोर्ड के पास जुर्माना लगाने का प्रावधान नहीं है और न ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को बंद करने का जोखिम बोर्ड उठा सकता था। प्लांट को बंद करने की स्थिति में सीवेज बिना ट्रीटमेंट के सीधा नाले से होता हुआ अश्वनी खड्ड में मिल जाता। सरकारी एजेंसियां होने के नाते केवल नोटिस का खेल ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आईपीएच के साथ खेलता रहा।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मल्याणा के सैंपल साल 2013 और 2014 में भी फेल होते रहे हैं। उस दौरान भी आईपीएच को बोर्ड की ओर से नोटिस जारी किए गए लेकिन उस दौरान पीलिया के मामले बड़ी संख्या में सामने नहीं आए। मल्याणा के आसपास ऐसे कई रिहायशी इलाके हैं जो सीवेज से कनेक्ट नहीं है। इनकी गंदगी भी खुले में नालों से होकर अश्वनी खड्ड में मिलती रही है।
सीवेज प्लांट में एक और ठेकेदार का नाम
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में एक और ठेकेदार का नाम सामने आ रहा है। इस ठेकेदार के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से स्लज उठाने का टेंडर है। यह कौन ठेकेदार है और इस प्रकरण को लेकर वह कितना जिम्मेदार है, यह जांच के बाद ही पता चल पाएगा लेकिन इस मामले में नए ठेकेदार का नाम सामने आने के बाद राजनीति भी गरमा गई है। बीजेपी ने सीधे तौर पर इस ठेकेदार को बचाने के लिए नगर निगम को लपेट लिया है।
पुलिस की एसआईटी में अब तक इस ठेकेदार का कहीं कोई जिक्र नहीं है। आईपीएच की ओर से भी इस ठेकेदार को लेकर कोई संकेत नहीं दिया है। यह ठेकेदार कौन हैं? आने वाले दिनों में ही इस बात का खुलासा हो पाएगा। वीरवार को एसआईटी की टीम ने अश्वनी खड्ड में आईपीएच के पानी लिफ्ट करने वाले संयंत्र की जांच की। इस दौरान इससे संबंधित जेई भी टीम के साथ था।
एसआईटी ने साक्ष्य के तौर पर कुछ रिकार्ड भी कब्जे में लिए हैं। इस पूरे मामले में यहां के लिए जिम्मेदार एसडीओ, जेई और पंप आपरेटर एसआईटी की जांच के दायरे में हैं। रिकार्ड को क्रास चेक करने के बाद यहां भी गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू हो सकता है। इसके बाद ही एसआईटी की छानबीन तीसरे चरण में पहुंचेगी। पहले चरण में एसआईटी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ढली और मल्याणा की जांच पूरी कर चुकी है।