नगर परिषदों और नगर पंचायतों में चुनाव की घोषणा होने के साथ ही 11 जनवरी तक आचार संहिता लागू हो गई है। इस अवधि में न तो विकास कार्यों के टेंडर होंगे और न ही नई पॉलिसी बनेगी। लोगों को बिजली, पानी और सीवरेज के नए कनेक्शन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी नहीं मिलेगा।
सिर्फ पहले से चल रहे प्रोजेक्टों पर ही काम होगा। हिमाचल में 54 शहरी निकाय हैं। इसमें 2 नगर निगम, 29 नगर परिषद और 23 नगर पंचायतें शामिल हैं। नगर निगम शिमला, लाहौल स्पीति और पांगी, भरमौर में आचार संहिता लागू नहीं होगी।
शहरी निकायों में हर महीने 60 से 70 लाख रुपये के विकास कार्यों के टेंडर होते हैं। इन कार्यों को करने से पहले हाउस की अनुमति लेनी होती है। जनप्रतिनिधियों की सहमति से ही विकास कार्यों का आवंटन होता है। इन कार्यों में सड़कें, रेलिंग, नालियां, डंगे, भवनों का निर्माण आदि शामिल है।
इसके अलावा निकायों के दायरे में आने वाले लोगों को अब पानी और सीवरेज के कनेक्शन के लिए एनओसी भी नहीं मिलेंगे। नए भवनों का निर्माण नहीं हो सकेगा। क्षेत्र में वह लोग काम कर सकेंगे जिन्होंने पहले निकायों से नक्शे पास करवा लिए हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के साथ ही प्रदेश सरकार को उपलब्धियों वाले होर्डिंग्स हटाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने यह आदेश मुख्य सचिव को दिए हैं।