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मैच न होने से सिर्फ सट्टेबाजों को नुकसान: वीरभद्र

Sat, 19 Mar 2016 08:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला

सार

  • आईसीसी ने जो टिकट बेचे, उन्हें मिल गया उनका पैसा
  • कहा, पाकिस्तान के साथ होने चाहिए भारत के अच्छे संबंध
  • हमने नहीं, पूर्व सैनिकों ने किया भारत-पाक मैच का विरोध
  • चंडीगढ़ में पाक प्रदर्शनी को अनुमति चैंबर ऑफ कॉमर्स ने दी
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विधानसभा सत्र के लिए जाते मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि धर्मशाला में भारत-पाक मैच रद्द होने से आईसीसी को कोई नुकसान नहीं हुआ है। जो टिकट उन्होंने बेचे थे, उनका पैसा उन्हें मिल गया है। अगर किसी का नुकसान हुआ है तो वे हैं सट्टेबाज। उन्होंने कहा कि धर्मशाला में क्रिकेट मैच हो रहे हैं और आगे भी होते रहेंगे।
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सीएम ने फिर दोहराया कि न तो उन्होंने मैच का विरोध किया और न ही सुरक्षा देने से मना किया। मैच का विरोध हिमाचल के पूर्व सैनिक और शहीद परिवार कर रहे थे। अनुराग ठाकुर स्वयं इस विषय को लेकर उनसे मिले थे। उन्हें भी पूर्व सैनिक और शहीद परिवारों से मिलने की बात कही थी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शिमला में विधानसभा के बाहर मीडिया से बातचीत में कहा कि वे भी चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान में अच्छे संबंध स्थापित होने चाहिए।

चाहे वे क्रिकेट के जरिये हो या राजनीतिक माध्यम से। हिमाचल भवन चंडीगढ़ में पाक कलाकारों की प्रदर्शनी पर सीएम ने कहा कि हिमाचल भवन का हाल चैंबर ऑफ कॉमर्स को दे रखा है। वो हाल को किसे दे रहे हैं, वह उनकी जिम्मेवारी है। प्रदेश सरकार का इसमें कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि कहीं भी जब नेशनल फेयर होता है तो उसमें पाकिस्तान भी प्रदर्शनी लगाता है।
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केंद्र को भेजी जाएगी नुकसान की रिपोर्ट- एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि केंद्र ने बारिश से हुए नुकसान की रिपोर्ट मांगी है। प्रदेश सरकार ने सभी जिलों को नुकसान की रिपोर्ट देने को कहा है। रिपोर्ट को संकलित कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

13वें वित्त आयोग से कम पैसा मिलने से बढ़ा कर्ज- मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल पर बढ़ता कर्ज चिंता का विषय है। इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। 13वें वित्त आयोग से कम पैसा मिलने से और पंजाब की तर्ज पर कर्मचारियों की वेतन बढ़ोतरी से भी प्रदेश कर्ज में डूबा है।

2010-11 में 2232 करोड़ के मुकाबले वर्ष 2014-15 में प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान के रूप में महज 406 करोड़ रुपये मिले हैं। प्रदेश सरकार संसाधन बढ़ा और अनावश्यक खर्चों में कटौती कर सरकार कर्ज को कम करेगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार को विधानसभा में बजट पर चर्चा का जवाब दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष के दौरान प्रदेश में 5000 से ज्यादा शिक्षक भर्ती किए जाएंगे। शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश की सरकारें केंद्र पर निर्भर होती हैं। उन्होंने कहा कि पेंशनरों के चिकित्सा बिलों का जल्द भुगतान होगा। इसके लिए सरकार ने 59 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। मुंबई, अहमदाबाद और अन्य राज्यों में हुई इंवेस्टर मीट का सरकार को फायदा हुआ है।

हिमाचल में 41 नए उद्योग आने को तैयार हुए हैं। इसके अलावा 60 उद्योगों ने विस्तारीकरण की हामी भरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया है। विपक्ष की ओर से रूसा पर निकाली गई खामियों और बाहरी राज्यों में छात्रों को प्रवेश न मिलने पर उन्होंने मामला केंद्र से उठाने की बात कही। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 को ध्यान में रखते हुए बजट तैयार किया है। बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बागवानी, उद्योग और बिजली को ध्यान में रखा है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार की सभी योजनाओं को गिनाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने रोपवे से लेकर सिनेमाघरों के टैक्स को कम किया है। किसानों की फ सलों को बचाने के लिए कृषि संरक्षण योजना को कृषि और बागवानी विवि में ट्रायल किया है। राष्ट्रीय बीमा योजना यूपीए सरकार ने शुरू की थी।

तत्कालीन सरकार ने इसमें कुछ नहीं किया था। कांग्रेस सरकार ने अब सभी को इसका लाभ देने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि एलईडी बल्ब की खरीदारी केंद्र की एजेंसी ने की है। सरकार ने कोई बल्ब नहीं खरीदे हैं। इसकी दरें भी केंद्र ने ही निर्धारित की हैं। पीलिया पर सरकार ने गंभीरता से कार्रवाई करते हुए पानी की सप्लाई अश्वनी खड्ड से बंद की।
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