सुन्नी-शिमला जिले की सीमा पर कोलडैम में चलाए सर्च ऑपरेशन में पानी में बहकर आईं लकड़ियों से काफी परेशान हो रही है। जिला शिमला पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीएआरफ और होमगार्ड के जवान 21 दिनों से सुबह से शाम तक घंटों शवों की तलाश में जुटे हुए हैं। समेज से लापता 20 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 13 शवों की तलाश जारी है।
समेज हादसे में लापता लोगों की तलाश के लिए सुन्नी-शिमला जिले की सीमा पर कोलडैम में चलाए सर्च ऑपरेशन में पानी में बहकर आईं लकड़ियों से खासी दिक्कतें आ रही हैं। हालत यह है कि डैम के एक किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में लकड़ियां फैली हैं। इस वजह से सर्च अभियान में खासी दिक्कतें आ रही हैं। इसके बावजूद जिला शिमला पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीएआरफ और होमगार्ड के जवान 21 दिनों से सुबह से शाम तक घंटों शवों की तलाश में जुटे हुए हैं।
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डैम से लकड़ियों को हटाने के लिए वन निगम को भी काम सौंपा गया था लेकिन लगातार पानी के साथ हजारों की संख्या में आने वाले लकड़ी के बड़े-बड़े टुकड़ों को निकालना उनके लिए भी चुनौती बना है। इस दौरान स्टीमर और मोटर बोट से टीमें डैम में उतरकर पानी के बीच शवों की तलाश का रही हैं। 1 अगस्त से चलाए अभियान में अभी तक समेज से लापता 20 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं जबकि 13 शवों की तलाश जारी है। इस अभियान में विभिन्न विभागों के 80 से अधिक कर्मचारी जुटे हुए हैं।
एडीसी शिमला अभिषेक वर्मा ने बताया कि कोलडैम में सर्च अभियान जारी है। टीमें सुबह से शाम तक शवों की तलाश कर रही हैं। उन्होंने बताया कि नदी में बहकर आने वाली लकड़ी से सर्च अभियान में दिक्कतें आ रही हैं। इसके बावजूद प्रशासन शवों की तलाश के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।