शहीद अंकेश के पिता को सांत्वना देते सेना के जवान।
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शहीद बेटे को रात के अंधेरे में नहीं दिन के उजाले में घर लाना है। उसने देश के लिए जान न्योछावर की है, ऐसा कोई काम नहीं किया, जिससे उसे रात को घर लाया जाए। उसकी शहादत हमारे लिए गर्व की बात है। यह बात बिलासपुर जिले के सेऊ गांव के शहीद अंकेश भारद्वाज के पिता बांचा राम ने कही। शहीद के पिता की इस बात को महत्व देते हुए प्रशासन ने शनिवार को हमीरपुर जिले के भोटा रेस्ट हाउस में अंकेश की पार्थिव देह को रखा है। रविवार सुबह शहीद की पार्थिव देह घर पहुंचेगी। जहां से राजकीय सम्मान के साथ मुक्ति धाम में अंतिम संस्कार किया जाएगा।
इससे पहले जब अंकेश की पार्थिव देह बिलासपुर जिले की सीमा पर दाखिल होगी, उस वक्त प्रदेश के खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेंद्र गर्ग वहां मौजूद रहेंगे। शनिवार को सेना के अधिकारी और शहीद को सलामी देने वाली गारद के जवान शहीद के घर पहुंचे। उन्होंने शहीद के पिता से मिलकर उन्हें सांत्वना दी और मुक्ति धाम जहां पर शहीद का अंतिम संस्कार किया जाना है, वहां का निरीक्षण किया। अरुणाचल प्रदेश में बर्फीले तूफान में शहीद हुए बिलासपुर जिले के सेऊ गांव के अंकेश की पार्थिव देह हादसे के सातवें दिन शनिवार को पठानकोट एयरबेस पहुंची। यहां अंकेश को सलामी देने के बाद दोपहर करीब साढ़े बारह बजे पार्थिव देह घुमारवीं के लिए रवाना की गई।
पठानकोट से करीब छह घंटे के सफर के बाद अंकेश की पार्थिव देह पैतृक गांव पहुंचनी थी, लेकिन रात के समय पार्थिव देह घर न लाने का फैसला लेते हुए शहीद के पिता ने रविवार सुबह घर लाने की बात कही। उन्होंने गर्व से कहा कि मेरा लाल भारत माता के लिए जान न्योछावर कर घर आएगा तो दिन के उजाले में आएगा। रात के समय उनके बेटे को वैसा सम्मान नहीं दे पाएंगे, जिस सम्मान का हकदार उनका बेटा है। इसके चलते प्रशासन ने हमीरपुर जिले के भोटा रेस्ट हाउस में अंकेश की पार्थिव देह रखी गई। उधर, अंकेश के पार्थिव देह के घर पहुंचने से पहले पूरे घर में राष्ट्रीय ध्वज लगाने के साथ-साथ घर को शादी की तरह सजाने का काम पूरा कर दिया गया। शहीद के पिता ने बेटे की अंतिम विदाई के लिए शांति का दान देने की अपील की है।