उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से मंगवाई जा रही मधुमक्खियां हिमाचल में सेब की पैदावार बढ़ा रही हैं। इन राज्यों से इटालियन ब्रीड की मधुमक्खियों को हिमाचल लाया जा रहा है। मधुमक्खियों के बॉक्स एक महीने के लिए किराये पर दिए जा रहे हैं। ये मधुमक्खियां प्रदेश में बागवानी वाले क्षेत्रों में सेब के पेड़ों पर पोलीनेशन प्रक्रिया में मदद कर रही हैं।
हिमाचल में आजकल सेब के बगीचों में फूल आ रहे हैं। बगीचों में परागण की प्रक्रिया चल रही है। कई क्षेत्रों के युवा भी मधुमक्खियों की बगीचों के लिए सप्लाई करने के काम से जुडे़ हैं। इससे अच्छी खासी कमाई हो रही है। बगीचों में सेब की दो तरह की किस्में होने पर ही अच्छी फसल लगती है। ये पोलीनाइजर और गैर पोलीनाइजर किस्में हैं।
पोलीनाइजर किस्मों से ही पराग के कण उठाकर मधुमक्खियां गैर पोलीनाइजर किस्मों पर डालती हैं। इसी से फ्रूट सेटिंग होती है। गैर पोलीनाइजर किस्मों में रेड डिलिशियस समेत कई तरह की उन्नत किस्में होती हैं, जिन्हें मार्केट में अच्छे रेट मिलते हैं। मधुमक्खियों की सहायता नहीं लेने पर सेब के बगीचों में फलों की मात्रा और गुणवत्ता दोनों ही प्रभावित होती हैं।
एक लाख से ज्यादा बॉक्स मंगवाते हैं बागवान- हिमाचल के सेब बगीचों के लिए इन दिनों लाखों के हिसाब से मधुमक्खियों के बॉक्स मंगाए जाते हैं। जिला शिमला की कोटखाई तहसील के बदरूनी निवासी विजय बेक्टा ने बताया कि वे 1998 से मधुमक्खियां हिमाचल ला रहे हैं।
यूपी, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान आदि पड़ोसी राज्यों से मधुमक्खियां मंगवाते आ रहे हैं। हर साल तीन हजार से चार हजार तक बॉक्स मंगवाते हैं। इस धंधे में सैकड़ों लोग जुड़े हैं। मधुमक्खियों के बॉक्स किराये पर एक महीने के लिए दिए जाते हैं। इसके 700 से 900 रुपये वसूले जाते हैं।
हिमाचल के पहाड़ी इलाके ठंडे होते हैं। इसीलिए यहां इटालियन मधुमक्खियां सर्दियों में टिक नहीं पाती हैं। ऐसी स्थिति में पोलीनेशन में सहायक मधुमक्खियों को बाहरी राज्यों से मंगवाना पड़ रहा है। ये अच्छी प्रजाति की होती हैं। लोगों को पहाड़ी मधुमक्खियों के पालन पर भी खास ध्यान देना चाहिए। ये ठंड में भी जिंदा रहकर अच्छा काम कर सकती हैं। - डॉ. विजय सिंह ठाकुर, कुलपति, डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विवि सोलन