सुंदरनगर में राज्यस्तरीय सुकेत देवता मेले के गुरुवार को समापन समारोह में मंडी जनपद के आराध्य बड़ादेव कमरूनाग रुष्ट हो गए और सौ साल के इतिहास में पहली बार शाही जलेब में शामिल नहीं हुए।
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सुंदरनगर में राज्यस्तरीय सुकेत देवता मेले के गुरुवार को समापन समारोह में मंडी जनपद के आराध्य बड़ादेव कमरूनाग रुष्ट हो गए और सौ साल के इतिहास में पहली बार शाही जलेब में शामिल नहीं हुए। वहीं, राजघराने की ओर से चढ़ाई जाने वाली चादर को भी अस्वीकार किया। सुकेत रियासत का यह प्राचीन देव समागम अपनी भव्यता के 100 वर्ष पूरे कर चुका है। मेले के समापन पर महामाया मंदिर से लेकर जवाहर पार्क तक भले ही भव्य जलेब निकाली गई, लेकिन सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार शाही जलेब में महामाया की पालकी के पीछे कमरूनाग को स्थान न मिलने पर रुष्ट होकर अकेले ही अपने देवलुओं के साथ मेला स्थल पहुंच गए।
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मेले में इस प्रकार परंपरा टूटने से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन के ढुलमुल रवैये से बड़ादेव कमरूनाग रुष्ट हो गए। अनुयायियों में प्रशासन की इस तरह की अनदेखी के चलते गहरा रोष है। मंडी जिले के 5 दिवसीय राज्यस्तरीय सुकेत देवता मेले का वीरवार को समापन हुआ है। समापन समारोह की अध्यक्षता प्रदेश सरकार में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने की। विधायक राकेश जम्वाल व पूर्व विधायक सोहन लाल ठाकुर भी साथ मौजूद रहे। इधर, श्री बड़ा देओ कमरूनाग कमेटी मझोठी रोहांडा के सचिव दुनी चंद ठाकुर ने कहा कि देवता की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है।