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हिमाचल: लाहौल में मूर्तिचा गांव के सामने टूटा यनीगंग ग्लेशियर, चार गांवों के लोग घरों में हुए कैद

Wed, 30 Nov 2022 06:51 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, लाहौल

सार

लाहौल-स्पीति की चंद्राघाटी के मूर्तिचा गांव के सामने बुधवार सुबह 9:30 बजे यनीगंग ग्लेशियर टूटकर गिर गया। इस घटना के बाद डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र के घरों में सात मिनट तक बर्फ गिरती रही। डर से सहमे लोग घरों में कैद हो गए।
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मूर्तिचा गांव के सामने टूटा यनीगंग ग्लेशियर - फोटो : संवाद
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की चंद्राघाटी के मूर्तिचा गांव के सामने बुधवार सुबह 9:30 बजे यनीगंग ग्लेशियर टूटकर गिर गया। इस घटना के बाद डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र के घरों में सात मिनट तक बर्फ गिरती रही। डर से सहमे लोग घरों में कैद हो गए। दिसंबर के अंतिम सप्ताह या जनवरी में ग्लेशियर टूटने और हिमखंड गिरने की घटनाएं होती हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो नवंबर में पहली बार ऐसी घटना हुई है।


जब यह घटना हुई, तब लोग अपने दैनिक कार्य निपटा रहे थे। जैसे ही पहाड़ की चोटी से ग्लेशियर टूटा तो इससे उठे बर्फ के बवंडर ने आसपास के चार गांवों रालिंग, मूर्तिचा, नुकर और जगला के तकरीबन 25 घरों की आबादी को सात मिनट तक घरों में कैद कर लिया। घरों की छतों सहित खेतों में बर्फ की परत जम गई। चंद्राघाटी के मूर्तिचा गांव के सामने नवंबर में माइनस तापमान के बीच यनीगंग ग्लेशियर का टूटना लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। 
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ग्लेशियर टूटा। - फोटो : संवाद
ऐसी घटना का होना तापमान में उतार-चढ़ाव माना जा रहा है। मूर्तिचा गांव के अमित डोगरा ने पहाड़ से गिरते ग्लेशियर और उससे उठे बवंडर को अपने मोबाइल में कैद किया है।



 
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ग्लेशियर टूटा। - फोटो : संवाद
लाहौल घाटी के सोनम पलदन (92) ने बताया कि बर्फबारी के बीच ग्लेशियर का गिरना आम बात है, लेकिन इस समय चोटियों में कम बर्फ और माइनस तापमान के बीच बड़े ग्लेशियर का गिरना चिंता का विषय है।



 

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लाहौल में ग्लेशियर टूटा। - फोटो : संवाद
इस महीने तापमान माइनस डिग्री होने और बर्फबारी कम होने से ग्लेशियर ठोस हो जाते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं खेल संस्थान के निदेशक अविनाश नेगी ने बताया कि ग्लेशियर किसी भी महीने में टूट सकता है।
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ग्लेशियर टूटा। - फोटो : संवाद
ग्लेशियर का टूटना तापमान पर निर्भर करता है। गोंधला पंचायत के प्रधान सूरज ठाकुर ने बताया कि यहां मौसम साफ चल रहा है। ऐसे में पुराने ग्लेशियर का यूं टूटना अच्छा संकेत नहीं है। पर्यावरणविद किशन का मानना है कि बेमौसम ग्लेशियर का टूटना ग्लोबल वार्मिंग का भी प्रभाव हो सकता है।
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