प्रदेश भर के अस्पतालों के लिए होने वाले दवा टेंडर की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाली एक कंपनी को समय अवधि पूरा होने के बाद प्रक्रिया में हिस्सा लेने पर बवाल मच गया है। कई कंपनियों के पदाधिकारियों ने अतिरिक्त निदेशक को पत्र लिखा है।
पत्र में लिखा है कि उक्त कंपनी ने समय के बाद टेंडर भरने की प्रक्रिया पूरी की है। इधर, महकमे ने दावा किया है कि ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद मेन्युल तरीके से लिए जाने वाले कागजात में समय लग जाता है। यह प्रक्रिया ई-टेंडर के बाद होती है।
स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के मेडिकल और अन्य अस्पतालों के लिए 600 दवाओं का टेंडर किया है। इस टेंडर में 60 से अधिक कंपनियों ने हिस्सा लिया है। इसमें कुछ नामी कंपनियां भी हैं। तेरह दिसंबर को टेंडर डॉक्यूमेंट जमा करने की शाम पांच बजे अंतिम समय था।
उसके बाद भी एक कंपनी को हिस्सा देने का आरोप लगा है। उधर, मामले पर जब बवाल मचा तो विभाग की ओर से इसकी तिथि को बढ़ा दिया गया। विभाग का कहना है कि बर्फबारी को देखते हुए तिथि 17 दिसंबर रखी गई। सुबह ग्यारह बजे तक टेंडर के डॉक्यूमेंट लिए गए। कुछ कंपनी के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि चहेतों को लाभ देने के लिए किया गया है।
ई टेंडर एक निष्पक्ष प्रक्रिया: डॉ. रमेश चंद
उप स्वास्थ्य निदेशक डॉ. रमेश चंद ने बताया कि ई टेंडर एक निष्पक्ष प्रक्रिया है। इसमें किसी भी तरह के पक्षपात की गुंजाइश नहीं है। इस प्रक्रिया में एक ही रेट पर पूरे प्रदेश के लिए दवाएं खरीदी जाएंगी। जिस कंपनी के कागजात पूरे होंगे उन्हें ही आगे की प्रक्रिया के लिए चयनित किया जाएगा।