हाईकोर्ट ने राजधानी शिमला और इसके उपनगरों में आवारा कुत्तों की समस्या पर संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव तथा नगर निगम को नोटिस जारी किया है। इसमें कोर्ट ने कुत्तों की टैगिंग, दोबारा स्टैरेलाइजेशन तथा इम्यूनाइजेशन करने के मामले पर आने वाले समय में गहराई से विचार करने की बात कही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने मालरोड पर आवारा कुत्ते द्वारा एक 5 वर्षीय बच्चे को काटे जाने पर मुआवजे को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के बाद यह बात कही।
2 अगस्त 2015 को 5 वर्षीय आदित्य अत्री को शिमला के मालरोड पर फू लचंद एंड संस की दुकान के सामने कुत्तों ने बुरी तरह से काट लिया था। कुत्तों ने बच्चे के दायें कान और सिर पर गहरे जख्म कर दिए थे। 3 से 4 सप्ताह तक बच्चे का आईजीएमसी में इलाज होता रहा। कई महीनों तक उसकी ड्रेसिंग तथा अन्य इलाज अभी तक जारी है। चिकित्सकों ने प्लास्टिक सर्जरी की सलाह भी दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि शहर में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का आवारा कुत्तों के कारण चलना दूभर हो गया है। आए दिन आवारा कुत्ते बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर हमला कर रहे हैं। शिमला आने वाले पर्यटकों को भी इनके कहर का सामना करना पड़ता है। राजधानी के मशहूर रिज मैदान और माल रोड पर झुंडों में घूमते आवारा कुत्ते आम देखे जा सकते हैं।
इलाज का खर्च भी दे नगर निगम
हाईकोर्ट ने प्रार्थी को अपनी प्लास्टिक सर्जरी और अन्य इलाज किसी भी अस्पताल से करवाने को कहते हुए नगर निगम को आदेश दिए कि वह जो भी इलाज के बिल प्रस्तुत करें उसे चार सप्ताह के भीतर अदा करें। प्रार्थी के अनुसार एक अप्रैल 2015 से 31 अगस्त 2015 तक आईजीएमसी में 290 लोगों को कुत्तों द्वारा काटे जाने के मामले सामने आए थे।
बंधित मार्गों पर अपनी गाड़ियां चलाने का समय तय करे एमसी
कोर्ट ने इसी मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम द्वारा बंधित तथा प्रतिबंधित सड़कों पर बेवजह गाड़ियों को दौड़ाने पर भी फटकार लगाई। कहा कि निगम को अपनी गाड़ियां दौड़ाने का समय निर्धारित करना चाहिए। कूड़े की गाड़ियां, सामान ढोने तथा पानी के टैंकर बिना किसी लगाम के शिमला के प्रतिबंधित मार्गों पर दौड़ती नजर आ जाती हैं जो शिमला में पर्यटन के दृष्टिकोण से सही नहीं है। अब मामले पर सुनवाई 26 नवंबर को निर्धारित की है।