शिमला। राजधानी में बिलासपुर के एक व्यक्ति से लाखों रुपयों की ठगी हो गई। शातिर मोबाइल टावर लगाने के नाम पर व्यक्ति को 11 लाख 42 हजार रुपये का चूना लगा गए। पीड़ित जगत राम उपायुक्त कार्यालय में कार्यरत हैं। शिकायत के आधार पर सदर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पुलिस को दी शिकायत में पीड़ित ने बताया कि कुछ महीने पहले उसको एक व्यक्ति का फोन आया। व्यक्ति ने बताया कि वह मोबाइल टावर लगवाता है। तुम्हारे पास खाली जगह हो तो वह मोबाइल टावर लगवा देगा। उनकी कंपनी टावर लगाने से पूर्व 25 लाख की धनराशि एडवांस देगी। सहमति जताने पर शातिर ने टावर की लाइसेंस फीस की एवज में उसके बैंक खाते में कुछ पैसे डलवाने की बात कही। कर्मचारी ने शातिर के खाते में साढ़े 6 हजार रुपये डलवा दिए। दो दिन बाद फिर फोन आया कि 50 हजार रुपये और डलवा दो, ताकि कागजी कार्यवाही पूरी की जा सके। इस पर कर्मचारी ने 50 हजार रुपये और जमा करवा दिए। इस तरह से सात महीने तक कर्मचारी ने कुल 11 लाख 42 हजार रुपये की राशि शातिर के खाते में जमा करवा दी।
इस बीच कर्मचारी को अहसास हो गया कि उसके साथ ठगी हो रही है। शातिर अभी भी पीड़ित से पैसे की डिमांड कर रहे हैं। इसके बाद कर्मचारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पीड़ित ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने और रुपये वापस दिलवाने की मांग की। इधर, सदर थाना पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।
--
बैंक और रिश्तेदारों से किया था पैसों का जुगाड़
पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक कोरोनाकाल में एक जनवरी को उसे एक निजी कंपनी की तरफ से कॉल आई। व्यक्ति ने टावर लगाने की पेशकश में 25 लाख रुपये एडवांस देने का प्रस्ताव दिया। पीड़ित भी शातिर के बाताें में आ गया और पहली मर्तबा साढ़े 6 हजार रुपये उसके खाते में ट्रांसफर करवा दिए। दूसरी बार बीमा के नाम पर 50 हजार, तीसरे बार सिविल स्कोर बढ़ाने के लिए 50 हजार, चौथी बार ग्रीन टैक्स भरने पर 3 लाख 50 हजार, पांचवीं बार इनकम टैक्स फीस के तौर पर 4 लाख, छठी बार टैक्स फीस के तौर पर 1 लाख 70 हजार और सातवीं बार रजिस्ट्रेशन फीस के तौर पर 1 लाख 16 हजार रुपये शातिर के बताए खाते पर ट्रांसफर करवा दिए। पीड़ित के मुताबिक उसने इसके लिए बैंक से लोन भी लिया था, इसके अलावा संबंधियों से पैसे उधार लिए थे।