एपिलेप्टोलॉजी में भी ली विशेषज्ञता
डॉ पृथिका कहती हैं, मैंने एपिलेप्टोलॉजी यानी मिर्गी के मरीजों का इलाज करने वाली पढ़ाई भी की। ऐसे मरीज कम होते हैं, जिसके कारण अन्य डॉक्टर्स पढ़ाई के दौरान इस विषय का चयन भी कम करते हैं। उन्होंने करियर के दौरान न सिर्फ मिर्गी के कई मरीजों की सर्जरी की, साथ ही उन्हें बिल्कुल ठीक भी किया। 1990 में न्यूरो सर्जरी क्वालिफाई किया और देश की पांचवीं महिला न्यूरोसर्जन बनी। आमतौर पर महिलाएं इस विषय का चयन कम ही करती हैं।
तीसरे स्टेज के कैंसर का चला पता
सबकुछ सही चल रहा था, इस बीच 2016 में हेल्थ चेकअप के दौरान पता चला कि उन्हें कैंसर है और वो भी तीसरे स्टेज में पहुंच गया है। उन्होंने हार नहीं मानी। डॉ पृथिका बताती हैं, किमोथेरेपी के दौरान शरीर में कई तरह की दिक्कतें होती थीं, भयानक जलन होती। करीब डेढ़ साल तक कैंसर का इलाज चलता रहा, आखिरकार उन्होंने इस रोग को हरा दिया।
अपने इंटरव्यूज में डॉ पृथिका कहती हैं-
जब भी आप कुछ बेहतर करने की सोचेंगे, ये समाज आपको हमेशा रोकेगा। यहां चयन आपका होना चाहिए, पूर्ण समर्पण के साथ। कैंसर से ठीक हुए आठ साल हो गए हैं अब मैं स्वस्थ हूं और लगातार काम कर रही हूं, मरीजों को देख रही हूं। आप कभी हिम्मत मत हारिए, क्योंकि जहां आपकी हिम्मत टूटती है उसके बिल्कुल बाद ही सफलता आपका इंतजार कर रही होती है।