आपको बता दें कि बीते फरवरी माह में मंजू ने अपने ही गांव के भीतर 16 साल की लड़की का बाल विवाह रुकवा दिया था। यही नहीं उन्होंने लड़के के घरवालों की पुलिस कंप्लेन भी की। इस घटना के बाद लड़के के घर वाले नाराज होकर मंजू को किडनैप करने की धमकी देने लगे। इसके बाद भी मंजू डरी नहीं।
मंजु ओडिशा के कालाहांडी में स्थित बोरभत गांव में रहती हैं। इस जगह पर महिलाओं की स्थिति काफी दयनीय है। यहां पर छोटी लड़कियों को स्कूल नहीं भेजा जाता है। उनके माता पिता उनकी कम उम्र में ही विवाह करवा देते हैं। इन कुरीतियों को खत्म करने की प्रेरणा मंजू को उनकी मां से मिली।
मंजु बताती हैं - "मेरी मां का 14 वर्ष की उम्र में ही मेरे पिता के साथ विवाह कर दिया गया था। उस दौरान मेरे पिता 17 साल के थे। मेरी मां के कुल 14 बच्चे हुए, जिनमें से केवल 4 जिंदा हैं। मैंने अपनी मां का दर्द और उनकी परेशानियों को करीब से देखा है। इसी से मुझे बाल विवाह रोकने की प्रेरणा मिली। मैं चाहती हूं कि जो दर्द मेरी मां ने सहा वो कोई और ना सहे।"
मंजू ने साल 2017 में 12 वीं कक्षा को पास करने के बाद ऑक्सफेम इंडिया की मदद से जागरूकता अभियान चलाया। इसमें उन्होंने महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा और बाल विवाह के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम किया। उनके इस कदम से इस गांव के गोंड समुदाय के लोगों में बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
मंजू का कहना है कि लड़कियों के लिए शिक्षा की बहुत जरूरत है। शिक्षा ही लड़कियों के बदलाव की पहली सीढ़ी होती है। मंजु ने हाल ही में बीबीए की डिग्री को भी प्राप्त किया। वो अब नौकरी करके एक स्वतंत्र जीवन जीने की इच्छा रखती हैं।