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बाल विवाह और घरेलू हिंसा के खिलाफ अभियान चला रही हैं 20 वर्षीय मंजू पात्रा, बचपन में मां की स्थिति देखकर ये नेक काम करने का लिया फैसला

Wed, 04 Aug 2021 04:13 PM IST
संकल्प सिंह लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

संस्कृति और अपनी धार्मिक पहचान में अक्सर लोग कुरीतियों को परंपरा मानकर उनकी बुराई नहीं करते। वहीं कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो इन सामाजिक बीमारियों का खुलकर विरोध करते हैं। इसी कड़ी में आज हम बात करेंगे ओडिशा की रहने वाली मंजू पात्रा की। मंजू की उम्र इस समय महज 20 साल की है। इस छोटी सी उम्र में भी वो कई बड़े काम कर रही हैं। मंजू बाल विवाह और महिलाओं के साथ होने वाली घरेलू हिंसा के खिलाफ एक अभियान चला रही हैं। 
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मंजु पात्रा - फोटो : Social media
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विस्तार
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आज भले ही हमने 21 वीं सदी में कदम रख दिया है, पर कई स्तरों पर हमारा पिछला पैर आज भी बहुत सदी पीछे है। आधुनिकता के इस दौर में हमने आज भी हजारों साल पुरानी कुरीतियां को पकड़ रखा है। भारत में ऐसे कई पिछड़े इलाके हैं, जहां पर खुलेआम बाल विवाह किया जाता है। गौरतलब बात है कि बहुत कम लोग ही इन कुरीतियों का खुल कर विरोध करते हैं। संस्कृति और अपनी धार्मिक पहचान में अक्सर लोग कुरीतियों को परंपरा मानकर उनकी बुराई नहीं करते। वहीं कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो इन सामाजिक बीमारियों का खुलकर विरोध करते हैं। इसी कड़ी में आज हम बात करेंगे ओडिशा की रहने वाली मंजू पात्रा की। मंजू की उम्र इस समय महज 20 साल की है। इस छोटी सी उम्र में भी वो कई बड़े काम कर रही हैं। मंजू बाल विवाह और महिलाओं के साथ होने वाली घरेलू हिंसा के खिलाफ एक अभियान चला रही हैं। 

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आपको बता दें कि बीते फरवरी माह में मंजू ने अपने ही गांव के भीतर 16 साल की लड़की का बाल विवाह रुकवा दिया था। यही नहीं उन्होंने लड़के के घरवालों की पुलिस कंप्लेन भी की। इस घटना के बाद लड़के के घर वाले नाराज होकर मंजू को किडनैप करने की धमकी देने लगे। इसके बाद भी मंजू डरी नहीं।

मंजु ओडिशा के कालाहांडी में स्थित बोरभत गांव में रहती हैं। इस जगह पर महिलाओं की स्थिति काफी दयनीय है। यहां पर छोटी लड़कियों को स्कूल नहीं भेजा जाता है। उनके माता पिता उनकी कम उम्र में ही विवाह करवा देते हैं। इन कुरीतियों को खत्म करने की प्रेरणा मंजू को उनकी मां से मिली। 

मंजु बताती हैं - "मेरी मां का 14 वर्ष की उम्र में ही मेरे पिता के साथ विवाह कर दिया गया था। उस दौरान मेरे पिता 17 साल के थे। मेरी मां के कुल 14 बच्चे हुए, जिनमें से केवल 4 जिंदा हैं। मैंने अपनी मां का दर्द और उनकी परेशानियों को करीब से देखा है। इसी से मुझे बाल विवाह रोकने की प्रेरणा मिली। मैं चाहती हूं कि जो दर्द मेरी मां ने सहा वो कोई और ना सहे।" 

मंजू ने साल 2017 में 12 वीं कक्षा को पास करने के बाद ऑक्सफेम इंडिया की मदद से जागरूकता अभियान चलाया। इसमें उन्होंने महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा और बाल विवाह के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम किया। उनके इस कदम से इस गांव के गोंड समुदाय के लोगों में बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। 
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मंजू का कहना है कि लड़कियों के लिए शिक्षा की बहुत जरूरत है। शिक्षा ही लड़कियों के बदलाव की पहली सीढ़ी होती है। मंजु ने हाल ही में बीबीए की डिग्री को भी प्राप्त किया। वो अब नौकरी करके एक स्वतंत्र जीवन जीने की इच्छा रखती हैं।
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