राजस्थान हाइकोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। जिससे अब सीआरपीसी की धारा 156 3 के दुरुपयोग पर रोक लग सकेगी। इससे अब सीआरपीसी की धारा 156 3 के तहत मजिस्ट्रेट की ओर से पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के लिए भिजवाए जाने वाले मामलों में कमी आएगी।
हाइकोर्ट ने कहा है कि संबंधित मजिस्ट्रेट आपराधिक परिवाद को पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज करने का आदेश देने से पहले प्रथमदष्टया मामले की जांच करे। यदि जरुरत हो तो वह मामले के सत्यापन के लिए परिवादी से शपथ पत्र भी ले।
अदालत ने कहा कि संज्ञेय अपराध होने पर ही मामले को 156 3 के तहत ही थाने में भेजा जाए। हाईकोर्ट के न्यायाधीश महेशचंद्र शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता देवदत्त की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए दिए।
हाइकोर्ट के इस आदेश के बाद अब मजिस्ट्रेट तथ्यहीन और आधारहीन शिकायतों को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर सकेंगे। जिससे अब झूठी और तथ्यहीन मुकदमों पर रोक लग सकेगी।
सामान्यतया किसी भी आपराधिक मामले में परिवादी पक्ष पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज नहीं होने पर कोर्ट की मदद लेते है, ताकि मजिस्ट्रेट के आदेश पर उनका मुकदमा दर्ज हो सके। लेकिन पुलिस अनुसंधान में ऐसे कई मामले गलत पाए गए। जिनमें तथ्य गलत थे।