राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों और इंसानों के बीच टकराव की घटनाएं खतरनाक मोड़ ले चुकी हैं। विगत एक माह में दो दर्दनाक घटनाएं इसी बात की तस्दीक करती हैं। पहले 16 अप्रैल को एक सात वर्षीय बालक और फिर 11 मई को अनुभवी रेंजर देवेंद्र चौधरी, एक ही बाघिन ‘कनकटी’ का शिकार बने। बाघिन को पहचान लिया गया है, लेकिन अभी तक उसे कोई आधिकारिक नंबर नहीं मिला है, जिसके चलते उसे फील्ड में 'कनकटी' नाम से जाना जा रहा है।
यह बाघिन रणथंभौर की प्रसिद्ध बाघिन टी-84 एरोहेड की बेटी है। वन विभाग के अनुसार कनकटी बेहद आक्रामक स्वभाव की है और उससे इंसानों का भय समाप्त हो चुका है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस बाघिन को जल्द किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर नहीं शिफ्ट किया गया तो आने वाले समय में और भी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं।
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रणथंभौर में खौफ का माहौल, जोन दो व तीन बंद
11 मई को रेंजर देवेंद्र चौधरी रणथंभौर के जोन तीन में यज्ञशाला के पास चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रहे थे, जब बाघिन ने अचानक हमला कर दिया। बाघिन ने रेंजर को दबोच कर जंगल में खींच लिया और करीब 20 मिनट तक वहीं बैठी रही। मौके पर पहुंचे वनकर्मियों ने शोर मचाकर बाघिन को भगाया और शव को अस्पताल पहुंचाया। यह घटना सिर्फ वन विभाग ही नहीं, पूरे रणथंभौर क्षेत्र को झकझोर कर रख देने वाली है।
एहतियातन, रणथंभौर का जोन दो और तीन पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। साथ ही प्रसिद्ध त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग को श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह से सील कर दिया गया है, क्योंकि इस मार्ग और इसके आसपास 17 से 18 बाघ-बाघिन और उनके शावकों की गतिविधि बनी रहती है।
वन मंत्री ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता का दिया भरोसा
घटना के बाद अस्पताल पहुंचे प्रदेश के कृषि मंत्री और सवाई माधोपुर विधायक डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मामले की गंभीरता से जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि बाघ आदमखोर हो चुका है या बाघों के व्यवहार में कोई बदलाव आ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री और वन मंत्री से बात कर मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता दिलवाने का आश्वासन दिया। रेंजर देवेंद्र चौधरी के पीछे डेढ़ साल का बेटा और जवान पत्नी रह गए हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी: कनकटी को एनक्लोजर में रखा जाए
रणथंभौर के वन्यजीव विशेषज्ञ धर्मेंद्र खांडल ने स्पष्ट किया कि कनकटी को खुले जंगल या अन्य टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करना खतरनाक हो सकता है। उनका सुझाव है कि इस बाघिन को एनक्लोजर (बड़े बाड़े) में रखा जाए ताकि वह किसी और को नुकसान न पहुंचा सके। फील्ड डायरेक्टर अनूप के आर ने भी बताया कि इस बाघिन को चिन्हित कर लिया गया है और उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जा चुकी है।
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20 वर्षों में 40 मौतें, 15 साल में सात वनकर्मी हमले का शिकार
रणथंभौर में बाघ-मानव संघर्ष कोई नई बात नहीं है, लेकिन हालात अब ज्यादा चिंताजनक हो गए हैं। पिछले दो दशकों में यहां बाघों के हमले में करीब 40 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, बीते 15 वर्षों में सात वनकर्मी टाइगर अटैक का शिकार हुए, जिनमें से तीन की मौत हो चुकी है।
अगस्त 2005 में एसीएफ दौलत सिंह, अक्तूबर 2012 में सहायक वनपाल घीसू सिंह, मई 2015 में वनपाल रामपाल सैनी, नवंबर 2021 में विजय मेघवाल, फरवरी 2023 में होमगार्ड मामराज, एक अप्रैल 2025 को वॉलिंटियर रामलाल मीणा और अब 11 मई को रेंजर देवेंद्र चौधरी पर हुए हमले इस समस्या की गंभीरता को उजागर करते हैं।