राजस्थान के जाट व वैश्य समाज को साधने का प्रयास।
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केन्द्रीय मंत्रिमण्डल विस्तार को राजस्थान के संदर्भ में देखा जाए, तो कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजस्थान के सबसे बड़े जाट व वैश्य समाज को साधने का प्रयास किया है। राजस्थान से पहले मंत्रिण्डल विस्तार में शामिल हुए सांवरलाल जाट की इस विस्तार में छुट्टी की चर्चा से राजस्थान जाट समाज नाराज हो गया था और अपने समाज का प्रतिनिधत्व का दबाव भी डालने में जुटा हुआ था। इधर, केंद्रीय मंत्रिमंडल में विजय गोयल को वैश्य समाज के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल किया गया है।
मोदी ने अपने मंत्रिमंडल फेरबदल में राजस्थान से पुराने दो को हटाकर नए तीन सांसदों को मंत्री बनने का मौका दिया है। केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ पहले से ही मंत्रिमण्डल में हैं। ऐसे में अब मोदी की टीम में राजस्थान से चार सदस्य जुड़ गए हैं। मोदी ने विस्तार में जाट चेहरे के तौर पर पहली बार सांसद बने राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष सी.आर. चौधरी को शामिल किया है। अनुसूचित जाति का प्रतिनिधिवत्व करने वाले निहालचंद को हटाकर, इनकी जगह अर्जुनराम मेघवाल शामिल हुए हैं।
सांवरलाल जाट की खराब तबीयत के कारण उनकी विदाई तय मानी जा रही थी। इसी वजह से मंत्रिमंडल विस्तार के लिए प्रदेश से नए जाट नेता की तलाश चल रही थी। नए विस्तार में पी.पी. चौधरी को जगह मिली, लेकिन जाट समाज इन्हें अपना प्रतिनिधि मानने को तैयार नहीं था। इसी कारण अंतिम समय में सी.आर. चौधरी का नाम तय किया गया। माना जा रहा है कि मोदी अर्जुनराम मेघवाल से प्रभावित हुए। इसलिए उन्होंने मेघवाल को अपनी टीम में रखा है।