सुप्रीम कोर्ट ने संतान उत्पत्ति के लिए एक कैदी को 15 दिन की पैरोल देने के राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। दोषी नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा काट रहा है। हाईकोर्ट ने 14 अक्तूबर को दोषी के अपनी पत्नी के जरिये दायर याचिका में बच्चे पैदा करने के लिए आकस्मिक पैरोल की मांग की गई थी।
यह था मामला
भीलवाड़ा के 34 साल के नंदलाल को एडीजे कोर्ट ने छह फरवरी 2019 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, तब से वह अजमेर की जेल में बंद था। 18 मई 2021 को उसे 20 दिन की पैरोल मिली थी। उसके बाद वह निर्धारित तिथि को लौट आया था। इसके बाद कैदी नंदलाल की पत्नी ने अजमेर कलेक्टर को अर्जी दी थी। कलेक्टर ने जब अर्जी पर कोई फैसला नहीं लिया, तब पत्नी हाईकोर्ट पहुंच गई। जिसके बाद हाईकोर्ट ने 15 दिनों का पैरोल देने का आदेश दिया।