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रूस-यूक्रेन युद्ध: उजहोरोद से लौटा पठानकोट का कुलजिंदर, कहा-तिरंगा लगी बस पर रूस और यूक्रेन के सैनिक नहीं करते गोलीबारी 

Sat, 05 Mar 2022 05:33 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब)

सार

कुलजिंदर ने कहा कि उनके एग्जाम पूरे हो चुके हैं, सिर्फ स्टेट एग्जाम रह गया था, डिग्री मिल जानी थी। इसलिए सरकार से अपील है कि उनके बारे में सोचा जाए कि वे भारत में आकर डॉक्टर बन सकें।
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पठानकोट में अपने परिवार के साथ कुलजिंदर सिंह। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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यूक्रेन में फंसे भारतीयों की वतन वापसी जारी है। यूक्रेन के उजहोरोद से पठानकोट आए गांव गोसाईपुर के कुलजिंदर सिंह ने बताया कि हंगरी बॉर्डर तक की 28 घंटे तिरंगा लगी बस में सफर किया। इस दौरान रूसी और यूक्रेनी किसी सैनिक ने गोलीबारी नहीं की। 

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कुलजिंदर उजहोरोद नेशनल यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा था। 28 फरवरी को उजहोरोद से बसों में बिठाकर कुलजिंदर व अन्य विद्यार्थियों को वहां से निकाला गया। कुलजिंदर ने बताया कि उनकी बस पर तिरंगा झंडा लगाया गया था। जिस बस के आगे तिरंगा झंडा होता था उस पर न तो यूक्रेन गोलीबारी करता था और न ही रूस के सैनिक। 28 घंटे के सफर के बाद उसे व अन्य विद्यार्थियों को हंगरी के बॉर्डर पर उतारा गया। वहां चेकिंग की गई। फिर इमीग्रेशन करवाया और बॉर्डर पार करके जाने दिया गया। कुछ ही दूरी पर भारतीय दूतावास द्वारा बसों का इंतजाम किया गया था। उनमें बैठा कर बुडापेस्ट ले जाया गया। वहां पर एक होटल में ठहराया गया और खाना भी खिलाया गया। फिर एयरपोर्ट ले जाया गया। वहां से 400 बच्चों के साथ भारत लाया गया। 

डिग्री मिलने में बाकी थे दो महीने

कुलजिंदर का कहना था कि उनकी फ्लाइट गाजियाबाद में उतारी गई। फिर गाजियाबाद से फ्लाइट में चंडीगढ़ लाया गया। चंडीगढ़ माता-पिता आए हुए थे, उनके साथ रात को 9:30 बजे घर पहुंच गया था। कुलजिंदर डॉक्टर बनने के लिए यूक्रेन गया था, पर यूक्रेन-रूस में जंग छिड़ने के बाद उसे घर लौटना पड़ा। उसने बताया कि यूक्रेन में उसके कोर्स के सिर्फ दो महीने रह गए थे। यदि दो महीने और पढ़ाई हो जाती तो उसे डिग्री मिल जाती और वह डॉक्टर बन जाता।

कुलजिंदर ने कहा कि उनके एग्जाम पूरे हो चुके हैं, सिर्फ स्टेट एग्जाम रह गया था, डिग्री मिल जानी थी। इसलिए सरकार से अपील है कि उनके बारे में सोचा जाए कि वे भारत में आकर डॉक्टर बन सकें। कुलजिंदर सिंह के पिता बूटा सिंह उप्पल का कहना है कि बेटा घर सही सलामत पहुंच गया है, इसके लिए वे परमेश्वर के शुक्रगुजार हैं।

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