लुधियाना में आतिशबाजी करते लोग।
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पंजाब में दिवाली के मौके पर इस बार जालंधर की आबोहवा सबसे अधिक प्रदूषित रही, जबकि मंडी गोबिंदगढ़ में हवा कम प्रदूषित रही। पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) ने दिवाली पर प्रदेश के छह प्रमुख शहरों जालंधर, अमृतसर, लुधियाना, खन्ना, मंडी गोबिंदगढ़ व पटियाला में हवा में प्रदूषण की मात्रा का सर्वे में खुलासा हुआ है।
यह सर्वे दिवाली पर गुरुवार सुबह सात बजे से लेकर शुक्रवार सुबह छह बजे तक कराया गया। पीपीसीबी से प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस साल पिछले साल के मुकाबले इन शहरों में प्रदूषण की मात्रा कम रही है। भले ही रात केवल आठ बजे से 10 बजे तक ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति रही है लेकिन लोगों ने इसे तोड़ा और खूब पटाखों का इस्तेमाल किया।
इसका नतीजा यह रहा कि पंजाब में दिवाली के मौके पर जालंधर की आबोहवा में सबसे अधिक प्रदूषित रही। आंकड़ों के मुताबिक जालंधर में इस बार दिवाली पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 327 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा, पिछले साल यह मात्रा 328 थी। वहीं अमृतसर में हवा में प्रदूषण की मात्रा 303 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रही।
पिछले साल पंजाब में अमृतसर में दिवाली के मौके पर सबसे अधिक हवा में प्रदूषण पाया गया था। यह मात्रा 386 थी। लुधियाना में इस साल यह मात्रा 289 रही, जबकि पिछले साल 376 रही थी। खन्ना का पिछले साल एयर क्वालिटी इंडेक्स 281 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था और इस साल 227 रहा है। मंडी गोबिंदगढ़ में सबसे कम 220 रहा है। वहीं पिछले साल यह 262 रहा था।
पटियाला में इस साल 241 और पिछले साल 334 रहा था। खास बात यह रही कि सर्वे के मुताबिक दिवाली पर पंजाब का औसतन एक्यूआई 268 (खराब) रहा है, जबकि पिछले साल यह 328 (बहुत खराब) था। इस साल केवल अमृतसर व जालंधर का एक्यूआई बहुत खराब श्रेणी में है। सबसे ज्यादा एक्यूआई में गिरावट पटियाला में दर्ज की गई है, जो 27.8 प्रतिशत रही है। वहीं जालंधर में सबसे कम गिरावट 0.3 प्रतिशत रही। पंजाब ने इस साल एयर क्वालिटी इंडेक्स में औसतन 18.3 प्रतिशत की गिरावट रही।