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Mohali: 30 साल पुराने फर्जी मुठभेड़ में दो पूर्व थानेदारों को उम्रकैद, सीबीआई कोर्ट का फैसला

Mon, 07 Nov 2022 03:27 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)

सार

पूर्व थानेदार शमशेर सिंह और जगतार सिंह को धारा 302, 120 व 218 के तहत दोषी ठहराया गया था। आज दोनों को सजा सुनाई गई।
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court new - फोटो : istock
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विस्तार
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30 साल पुरानी फर्जी मुठभेड़ के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को दो पूर्व थानेदार शमशेर सिंह और जगतार सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। इस केस में कुल 17 गवाहों ने अपने बयान दर्ज करवाए थे। पीड़ित परिवार ने कहा कि इस फैसले से आतंकवादी होने का दाग धुल गया। सालों बाद न्याय मिला है।

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करीब 30 साल पहले थाना सदर तरनतारन की पुलिस जेल से गांव उबोके निवासी हरबंस सिंह को जेल से लेकर आई थी। पुलिस ने दावा किया था कि 15 अप्रैल, 1993 को सुबह साढ़े चार बजे वह हरबंस सिंह को हथियारों की बरामदगी के लिए ले जा रहे थे, तभी आतंकियों ने पुलिस पर हमला कर दिया। इसमें हरबंस सिंह और एक अन्य आतंकी की मौत हो गई। 

हरबंस सिंह के भाई परमजीत सिंह को मामला संदिग्ध लगा था। उन्होंने अपने भाई को इंसाफ दिलाने के लिए एक लंबी लड़ाई लड़ी। वह सुप्रीम कोर्ट तक गए। सुप्रीम अदालत के आदेश पर सीबीआई जांच हुई। सीबीआई ने एनकाउंटर फर्जी पाया। साल 2002 में तत्कालीन एसएचओ, एसआई शमशेर सिंह, एएसआई जागीर सिंह और एएसआई जगतार सिंह और थाने में तैनात सभी मुलाजिमों पर आरोप पत्र दाखिल किया गया था। ट्रायल के दौरान पूरन सिंह और जागीर सिंह की मौत हो गई थी। जुर्माना न चुकाने पर दोषियों को दो साल अतिरिक्त जेल में बिताने होंगे। धारा-218 के दो साल की अतिरिक्त कैद और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना न चुकाने पर दोनों को दो महीने और जेल में बिताने पड़ेंगे। 

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