जीरकपुर। बलटाना के एकता विहार के बाद वीरवार को रविंद्रा एनक्लेव में 21 नए मामले सामने आए हैं। इनके साथ ही अब डायरिया के कुल 300 मरीज हो गए हैं। अभी तक डायरिया से दो लोगों की मौत हो चुकी है। बलटाना और जीरकपुर की अलग-अलग कॉलोनियों से वीरवार को कुल 81 लोगों में डायरिया की पुष्टि हुई है। इनमें एकता विहार, रविंद्रा एनक्लेव, पाल्म एनक्लेव, स्वामी एनक्लेव सहित आधा दर्जन कॉलोनियां शामिल हैं। जीरकपुर में लगातार बढ़ रहे डायरिया के मामलों ने जिला प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इसलिए वीरवार की सुबह मौके पर मोहाली डीसी और एसडीएम जांच के लिए पहुुंचे थे, उनके जाने के बाद स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू पहुंचे।
वाटर सप्लाई और ड्रेनेज सिस्टम था सीवरेज बोर्ड के पास
पंजाब वाटर सप्लाई एवं सीवरेज बोर्ड ने साल 2012 में अपना पूरा काम जीरकपुर एमसी को सौंप दिया था। उस दौरान यहां शहर का सीवरेज का मास्टर प्लान भी एमसी को सौंप दिया। उस प्लान में शहर की सीवर लाइनों और वाटर सप्लाई लाइनों का पूरा डाटा है। एमसी को सौंपने के बाद अब वो प्लान कहीं गायब हो गया है। पंजाब वाटर सप्लाई और सीवरेज विभाग के पास इसकी मास्टर कॉपी है, लेकिन एमसी के पास इसका रिकॉर्ड नहीं है। दोनों अथॉरिटीज की आपस में तालमेल की कमी से शहर का पानी और सीवरेज के सिस्टम पर ठीक से काम नहीं हो पा रहा है। शहर में किस लेवल पर पहले की लाइनें पड़ी हैं और किस पर अब डाली जानी हैं, यही तय नहीं हो पाता है। यह तालमेल की कमी का एक बड़ा उदाहरण है। पंजाब वाटर सप्लाई और सीवरेज बोर्ड से शहर का सीवरेज और वाटर सप्लाई का काम जीरकपुर एमसी ने 8 अगस्त 2012 को टेकओवर किया। उस समय शहर में मेन सीवर लाइन और कॉलोनियों के अंदर की छोटी सीवर लाइन की लंबाई करीब 200 किलोमीटर थी।
2012 के बाद शहर में सीवरेज लाइन डालने में नियमों की जमकर उल्लंघना की गई। एमसी के ठेकेदारों और लोगों ने भी अपनी मर्जी से यहां लाइनें डाली। अधिकतर ने तो इसकी फीस तक नहीं चुकाई। मनमाने तरीके से किए गए काम का खामियाजा आज यहां पब्लिक को भुगतना पड़ रहा है। हालत इतनी खराब है कि बार-बार सीवरेज लाइनें जाम हो रही हैं। पीने के पानी में सीवरेज मिल रहा है। लोग बीमार हो रहे हैं।
कोट
बलटाना के एकता विहार और आसपास के इलाके में सीवरेज लाइनों और वाटर सप्लाई लाइनाें की जांच की जा रही है। जहां पर खामी है, उसे सुधारा जा रहा है। - गिरीश वर्मा, ईओ, नगर परिषद जीरकपु़र।