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पंजाब विधानसभा चुनाव: राजनीतिक दलों से प्रदूषण पर पूछे जाएंगे सवाल, लुधियाना में 20 दिसंबर को होगी जवाबतलबी

Thu, 16 Dec 2021 11:03 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)

सार

पंजाब में बिगड़ते पर्यावरण को लेकर राजनीतिक दल अपने चुनावी घोषणा पत्र में क्या करेंगे, इसका जवाब उनसे मांगा जाएगा। इसके लिए पंजाब वातावरण चेतना लहर का गठन किया गया है।
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लुधियाना का बुड्ढा दरिया। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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पंजाब के चुनाव में इस बार नेताजी को पर्यावरण के प्रति किए गए प्रयासों पर भी जवाब देना होगा। समय बदल रहा है, लिहाजा मुद्दे भी बदल रहे हैं। सड़क, बिजली, पानी, सफाई के अलावा पर्यावरण भी एक मुद्दा बन गया है। पंजाब में बिगड़ते पर्यावरण को लेकर राजनीतिक दल अपने चुनावी घोषणा पत्र में क्या करेंगे, इसका जवाब उनसे मांगा जाएगा। इसके लिए पंजाब वातावरण चेतना लहर का गठन किया गया है। इसमें पद्मश्री संत बलवीर सिंह सीचेवाल, पद्मश्री संत सेवा सिंह खडूर साहिब, पद्मभूषण बीबी इंदरजीत कौर पिंगलवाड़ा व तख्त श्री दमदमा साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी केवल सिंह इस चेतना लहर को आगे बढ़ाएंगे। आईएएस काहन सिंह पन्नू भी इस लहर के साथ जुड़े हैं, उन्होंने अब संगठन के लिए मैनिफेस्टो तैयार किया है। जिसे प्रत्येक राजनीतिक दल के आगे रखा जाएगा। 

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संगठन की तरफ से राजनीतिक दलों की आंखें खोलने के लिए पंजाब में फैल रहे प्रदूषण के सभी आकंड़ों को रखने की तैयारी है। इसमें प्रदूषण के पांच प्रमुख बिंदुओं को लिया गया है। इस बाबत लुधियाना में 20 दिसंबर को एक समारोह का आयोजन भी किया जा रहा है जिसमें राजनीतिक दलों के नेताओं को बुलाकर उनकी पार्टी के मेनिफेस्टो में पर्यावरण को बचाने के लिए क्या है, उसके संबंध में पूछा जाएगा। राजनीतिक दलों को संगठन की तरफ से पर्यावरण को बचाने के लिए राजनीतिक दलों को पांच अंक दिए जाएंगे ताकि वह इसे अपने घोषणा पत्र में शामिल करें। 

ये मुद्दे हैं अहम

गिरता भूजल:  1988 में पीएयू की रिपोर्ट खुलासा करती है कि पंजाब में हर साल आधा मीटर भूजल का स्तर नीचे जा रहा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड ने साल 2019 में एक रिपोर्ट दी है, इसमें साल 2013 से लेकर 2017 के आकंड़ों को रखा गया है। इसमें बताया गया है कि पंजाब की धरती के नीचे तीन परतों में 320 अरब घन पानी है, हर साल महज 21 अरब घन पानी रिचार्ज हो रहा है। हर साल धरती से 35 अरब घन पानी निकाला जा रहा है। पंजाब में हर साल 14 अरब घन पानी का स्तर गिर रहा है। 

जलस्त्रोतों का दूषित होना: पंजाब के 163 शहरों में प्रतिदिन 2200 मिलियन लीटर सीवरेज पानी की निकासी होती है। इसमें 1600 मिलियन लीटर को ट्रीटमेंट प्लांट से साफ किया जा रहा है। जोकि 128 शहरों में लगे है। बुड्ढा दरिया इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यहां से प्रतिदिन दूषित पानी को सतलुज दरिया में छोड़ा जा रहा है। पंजाब में चार हजार उद्योग पानी की प्रयोग करते है, यह सभी अपने आसपास खाली ड्रेन में दूषित पानी फेंक कर रहे है। इससे धरती का पानी दूषित होता जा रहा है। 

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वायु प्रदूषण: स्वच्छ हवा का इंडेक्स का स्तर 50 तक रहना चाहिए। लेकिन पंजाब में बरसात के मौसम को छोड़ कर कभी इंडेक्स 100 से नीचे नहीं रहता है। नवंबर माह में यह पांच सौ तक पहुंच जाता है। साइंस की भाषा में इसे आम लोगों और पेड़ पौधों और जंतुओं के लिए खतरनाक माना जाता है। कोरोना महामारी में सब बंद होते पंजाब के लोगों को बर्फ के पहाड़ दिखने लगे थे। 15 साल पुराने कामर्शियल व्हीकल नहीं चल सकते है, फिर भी दौड़ रहे है। राजनीतिक दलों ने इस पर बात जरूर की लेकिन कोई काम नहीं किया। 

कचरा प्रदूषण: पंजाब के शहरों में प्रतिदिन 43 सौ टन कचरा निकलता है। इस कचरे के निपटाने के लिए आज तक किसी राजनीतिक दल ने कुछ नहीं किया है। कचरे के लगे ढेरों से हर चीज दूषित हो रही है। सरकार ने घरों से कचरा एकत्र करने के लिए योजनाएं बना दी, लेकिन कचरे के ढेर को संभलाने के लिए कुछ नहीं किया। पलास्टिक बैग को पूरी तरह से प्रतिबंध है, फिर से पंजाब में सरेआम बिक रहे है। इसका जिम्मेदार कौन है। 

सूबे में कम होते जंगल: माहिरों के अनुसार किसी भी प्रदेश में 33 फीसदी एरिया वन के अधीन होना चाहिए। पंजाब में साल 1947 में यह लगभग 40 फीसदी था। आज यह कम होकर महज छह फीसदी रह गया है। जो प्रति व्यक्ति चार पेड़ होते है, जबकि यह कम से कम प्रति व्यक्ति दस पेड़ होने चाहिए। पंजाब में जंगल को बचाना अति जरूरी है। लुधियाना के मत्तेवाड़ा जंगल को बचाने के लिए वहां किसी भी तरह की एक्टिविटी को रोका जाना चाहिए। ऑक्सीजन को पूर्ति की जगह राजनीतिक दल मुफ्त आटा दाल योजनाएं दे रहे है। 

ध्वनि प्रदूषण: पंजाब में ध्वनि प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन चुकी है। कानून के अनुसार सुबह शाम ध्वनि प्रदूषण 45 डेसिबल से ज्यादा नहीं होना चाहिए। श्री अकाल तख्त साहिब की तरफ से धार्मिक स्थलों को सुबह शाम लाउड स्पीकर की आवाज परिसर के अंदर तक रखने के आदेश दिए। वहीं पंजाब सरकार के वातावरण विभाग की तरफ से ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए बनाए गए कानून का आज तक सख्ती से पालन नहीं किया गया है।

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